आज नई दिल्ली तकनीक का केंद्र बन गई है। ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ 16 फरवरी से भारत मंडपम में शुरू हो गया है। 20 फरवरी तक कार्यक्रम जारी रहेगा। दुनिया भर से आए लोग यहां देखेंगे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैसे हमारी जिंदगी बदल सकती है। ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026’ भी इस सम्मेलन का हिस्सा है। 300 से ज्यादा कंपनियां अपने नए AI उपकरणों और उपकरणों को इसमें प्रदर्शित कर रहे हैं। यहां आप खेती, शिक्षा, चिकित्सा और दैनिक जीवन से जुड़ी नई तकनीक को करीब से देख सकते हैं।
भारत विश्व का सबसे बड़ा कृत्रिम बुद्धिमत्ता मंच बना
भारत अब तकनीक के बड़े मंच पर है। इस समिट में सौ से अधिक देशों से लोग आए हैं। बहुत से देशों के राष्ट्रपति और मंत्री भी उपस्थित होंगे। यहां बड़े वैज्ञानिक और कारोबारी नेता आ रहे हैं।
यह सिर्फ एक शो नहीं है। यह भविष्य का चित्रण है। यहां लोग देखेंगे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ मोबाइल या कंप्यूटर नहीं है। यह भी खेत में काम कर सकता है। यह अस्पताल के चिकित्सकों को सहायक हो सकता है। यह बच्चों को पढ़ाने में भी सक्षम है।
70,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र भारत मंडपम में इस एक्सपो के लिए तैयार किया गया है। यहां पहुंचते ही आपको लगता है कि आप आने वाले कल में आ गए हैं।
आम लोगों के लिए क्या खास है?
इस समिट में आम लोगों के अलावा बड़े नेता भी आ सकते हैं। यहां हर उम्र का व्यक्ति कुछ अलग है।
पहले AI इम्पैक्ट एक्सपो है। 30 से अधिक देशों की 300 से अधिक कंपनियां यहां अपने उत्पादों को प्रदर्शित कर रही हैं। मशीनें संवाद करती हैं। Robots चलते हैं। फसल की बीमारी को पहचानने वाला सॉफ्टवेयर स्क्रीन पर दिखाया जा रहा है। लोग इसे देखकर हैरान हो रहे हैं।
‘YUVAi’ और ‘AI for ALL’ जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों और युवावर्ग के लिए बनाए गए हैं। यहाँ बच्चे AI टूल्स का इस्तेमाल पढ़ाई में कैसे करें। AI गणित को आसानी से समझा सकता है अगर कोई बच्चा गणित से घबरा जाए। AI अंग्रेजी सीखने में मदद कर सकता है।
एक्सपो में ऐसे मॉडल भी दिखाए जा रहे हैं जो फसल बीमारी को जल्दी पता लगा सकते हैं। कृषक अपने मोबाइल फोन से चित्र खींचेंगे। AI पौधे को बीमार बताएगा। फसल इससे बच सकती है।
अस्पतालों में भी नए तरीके प्रस्तुत किए जा रहे हैं। Robots रिपोर्ट पढ़कर डॉक्टर को जल्दी सलाह दे सकते हैं। इससे उपचार सस्ता और जल्दी हो सकता है।
यहाँ भी भाषाओं का अनुवाद करने वाले उपकरण हैं। अब लोग जो एक भाषा बोलते हैं, दूसरी भाषा समझ सकते हैं। लोग इससे आसानी से बात कर सकेंगे।
अनुभव क्षेत्र से भविष्य का चित्रण
समिट में कई विशिष्ट क्षेत्र बनाए गए हैं। थीमैटिक पैवेलियन इनका नाम है। यहां मशीनों को खुद चलाकर देख सकते हैं।
एक स्मार्ट स्वास्थ्य निगरानी मशीन लगी है। यह दिल की धड़कन और शरीर की सूचना देता है।
AI एक स्थान पर ट्यूटर है। बच्चा प्रश्न पूछता है। यंत्र तुरंत प्रतिक्रिया देता है। खेल-खेल में बच्चे पढ़ सकते हैं।
यह सब देखकर लगता है कि आने वाले समय में शिक्षा और चिकित्सा की प्रणाली बदल सकती है।
बड़े नाम और व्यापक मौजूदगी
इस समिट में दुनिया भर के प्रमुख कारोबारी और नेता भी शामिल होंगे। ब्राजील के राष्ट्रपति लुला डी सिल्वा और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों दोनों आने की उम्मीद है। विभिन्न देशों के मंत्री भी इसमें शामिल होंगे।
यहां तकनीक क्षेत्र के महान लोग भी होंगे। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल के वरिष्ठ अधिकारी, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई यहां उपस्थित होंगे।
भारत के बड़े उद्यमी भी इसमें शामिल हैं। इस मंच पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी, टाटा संस के एन. चंद्रशेखरन, इंफोसिस के नंदन नीलेकणि, भारती एंटरप्राइजेज के सुनील भारती मित्तल, टीसीएस के के. कृतिवासन और एचसीएल टेक की रोशनी नादर मल्होत्रा शामिल हैं।
इतने बड़े नामों का आगमन बताता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब दुनिया की सबसे बड़ी शक्तिओं में से एक बन चुका है।
पूरे पांच दिन का कार्यक्रम
हर दिन समिट में अलग है।
16 फरवरी को पहले दिन, नीति बनाने वाले लोग और विशेषज्ञ गोलमेज बैठक करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम पांच बजे एक्सपो का उद्घाटन करेंगे। 300 से ज्यादा भारतीय और विदेशी स्टार्टअप यहां अपने AI उपकरणों को दिखाएंगे।
17 फरवरी को आम लोगों से जुड़े क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, महिला शक्ति और दिव्यांगों की मदद जैसे विषयों पर बहस होगी। सरकार छह विशिष्ट खोज पत्रों को जारी करेगी। इन किताबों में बताया जाएगा कि कृत्रिम बुद्धि से इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिवर्तन कैसे लाया जा सकता है।
18 फरवरी को विश्व के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक और शोधकर्ता अपनी नवीनतम खोजों को सार्वजनिक करेंगे। कंपनियां ऑनलाइन प्रदर्शन करेंगे। लोग मशीनों का असली काम देखेंगे।
19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन समारोह में भाषण देंगे। बिल गेट्स, सैम ऑल्टमैन और सुंदर पिचाई उनके साथ बैठेंगे। इस दिन बड़ी साझेदारी और निवेश पर चर्चा होगी। फैसले होंगे। भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र को विकसित करने का लक्ष्य रखेगा।
20 फरवरी को GPAI काउंसिल का सम्मेलन होगा। इसमें सदस्य देश सुरक्षित और विश्वसनीय AI बनाने पर चर्चा करेंगे।
तीन सूत्र और सात चक्र
इस बार समिट सात चक्रों में विभाजित है। इसमें ह्यूमन कैपिटल, सोशल एम्पावरमेंट, सुरक्षित और भरोसेमंद कृत्रिम बुद्धि, इनोवेशन, साइंस, कृत्रिम बुद्धि का लोकतंत्रीकरण और आर्थिक विकास शामिल हैं।
तीन सूत्रों पर समिट का पूरा विचार आधारित है।
पहले पीपल। इसका अर्थ है कि कृत्रिम बुद्धि इंसानों के हित में काम करेगी। इससे हमारी संस्कृति और विविधता सम्मानित होगी।
दूसरा प्लैनेट है। यानी विकास, जिम्मेदारी के साथ। प्रकृति की ओर देखो।
तीसरा है विकास। Artificial Intelligence सबको एकजुट करेगा। प्रत्येक व्यक्ति को अवसर मिला।
खेती में कृत्रिम बुद्धि की शक्ति
भारत कृषि पर निर्भर है। यहाँ लाखों कृषक काम करते हैं। AI उनकी बहुत मदद कर सकता है।
फसल बीमार होने पर किसान को अक्सर देर से पता चलता है। AI मॉडल चित्रों से बीमारी का पता लगा सकते हैं। इससे किसानों को जल्दी उपचार मिल सकता है। नुकसान बहुत कम होगा।
AI भी मौसम की जानकारी दे सकता है। किसान बुवाई और कटाई को समय पर कर सकते हैं। इससे उत्पादकता बढ़ सकती है।
ऐसे कई मॉडल सम्मेलन में दिखाए जा रहे हैं। उन्हें देखकर किसान तकनीक का दोस्त बन सकते हैं।
पढ़ने का तरीका बदलेगा
किताबों के साथ-साथ बच्चे अब मशीन से भी सीखेंगे। AI ट्यूटर प्रत्येक बच्चे को अलग-अलग पढ़ा सकता है। बच्चा धीमे सीखने पर अधिक समय मिलेगा। तेज आदमी आगे बढ़ेगा।
AI ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर सकता है जहां अच्छे शिक्षक नहीं हैं। बच्चे कंप्यूटर या मोबाइल पर पढ़ सकते हैं।
बच्चों के लिए समिट में विशेष सेशन हैं। उन्हें AI का सही इस्तेमाल करना सिखाया जा रहा है।
सेहत की नई उम्मीदें
AI अस्पतालों में भी प्रभावी हो सकता है। रिपोर्ट पढ़ने में पर्याप्त समय लगता है। AI डेटा को जल्दी देख सकता है। चिकित्सक को संकेत दे सकता है।
टेलीमेडिसिन और AI गांवों में काम कर सकते हैं जहां कम डॉक्टर हैं। मरीज अलग से सलाह ले सकता है।
समिट में स्मार्ट स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली दिखाई देंगी। यह मशीनें सीधे सूचना देती हैं। इससे लोगों की जान बच सकती है।
भारत का बड़ा प्रयास
यह समिट भारत को तकनीक में पीछे नहीं है। देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने की तैयारी कर रहा है। सरकारें, कंपनियां और स्टार्टअप एक दूसरे से सहयोग कर रहे हैं।
जब इतने बड़े वैज्ञानिक और नेता एक मंच पर मिलते हैं, तो इसका बहुत बड़ा प्रभाव होता है। निवेश अधिक होता है। नवनिर्माण होते हैं। युवा लोग मौका पाते हैं।
दिल्ली में चल रहा यह कार्यक्रम केवल एक इवेंट नहीं है। यह अतीत की कहानी है। यहां से निकलने वाले निर्णय हमारी जिंदगी आने वाले वर्षों में बदल सकते हैं।
AI आज दूर की बात नहीं है। यह खेत में है। यह हमारे विद्यालय में है। इसे हमारे अस्पताल में रखा गया है। भारत के बड़े मंच पर अब यह सबके सामने है।
दिल्ली का यह महाकुंभ दिखाता है कि तकनीक को सही तरह से उपयोग किया जाए तो यह सभी को फायदा पहुंचा सकता है। आने वाले दिनों में हम इस शक्ति का उपयोग कैसे करेंगे।