भारत और पाकिस्तान का मुकाबला हमेशा अलग होता है। जब भी ये दोनों टीमें मैदान पर उतरती हैं, पूरी दुनिया उसी मैच पर केंद्रित होती है। इसके बावजूद, इस बार मैच से पहले ही हालात गर्म हो गए हैं। क्रिकेट ही नहीं, राजनीति और कूटनीति भी चर्चा में हैं। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी कोलंबो पहुंच गए हैं। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने भी भारत-पाक मैच का न्योता ठुकरा दिया है। मैच से पहले इससे एक और बहस शुरू हुई है।
यह सिर्फ क्रिकेट मैच की तरह नहीं लग रहा है। यह एक महत्वपूर्ण कहानी बन गया है।
कोलंबो में भव्य खेल की तैयारी
भारत और पाकिस्तान टी20 विश्व कप कोलंबो में खेलेंगे। दर्शक इस मैच को लेकर बहुत उत्साहित हैं। टिकटों की बहुत मांग है। होटल खाली हैं। सुरक्षा बढ़ी है। इस बड़े मुकाबले का हर कोई उत्सुक है।
विभिन्न देशों के बीच क्रिकेट मैचों में अक्सर भावनात्मक संबंध होते हैं। खिलाड़ी मैदान पर उतरते हैं, दर्शकों का दिल भी धड़कता है। इसलिए इस मैच को “हाई-वोल्टेज” कहा जाता है।
पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी कोलंबो पहुंचे
रविवार को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष मोहसिन नकवी कोलंबो पहुंचा। समाचार पत्रों में कहा गया है कि उनका मकसद सिर्फ मैच देखना नहीं है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अध्यक्ष जय शाह सहित अन्य अधिकारियों से भी उनकी मुलाकात होगी।
क्रिकेट बोर्डों के बीच हाल ही में कुछ मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ा है, सूत्रों ने बताया। Nakvi इस तनाव को कम करना चाहते हैं। वे बातचीत करके परिस्थितियों को सुधारना चाहते हैं।
माना जाता है कि उनकी इस यात्रा बहुत महत्वपूर्ण है। क्रिकेट के बाहर भी बहुत कुछ हो रहा है। नकवी की उपस्थिति इन बहसों को और भी तेज कर रही है।
पाकिस्तान ने पहले बांग्लादेश को समर्थन नहीं दिया
यह कहानी कुछ दिन पहले शुरू हुई थी। भारत दौरे से बंगलादेश ने इनकार कर दिया था। बाद में पाकिस्तान सरकार ने भारत को बांग्लादेश के समर्थन में खेलने से मना कर दिया। यह निर्णय चौंकाने वाला था।
क्या भारत-पाक मैच अब रद्द हो जाएगा? क्या यह टूर्नामेंट को प्रभावित करेगा? माहौल अनिश्चित था।
लेकिन इसके बाद आईसीसी, पाकिस्तान और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने कई बार चर्चा की। बैठकें हुईं। पाकिस्तान ने अंततः अपना निर्णय बदलकर मैच खेलने की पुष्टि की।
इस निर्णय ने टूर्नामेंट को बचाया। प्यास ने खुशी से सांस ली।
प्रधानमंत्री से मुलाकातें और महत्वपूर्ण बैठकें
समाचार पत्रों में कहा गया है कि मोहसिन नकवी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से भी मुलाकात की थी। वे क्रिकेट बोर्डों (जैसे आईसीसी) के साथ संबंधों पर चर्चा की।
लाहौर में एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई थी। वहां आईसीसी के उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष ने चर्चा की। इस बैठक के बाद गतिरोध खत्म हो गया। पाकिस्तान ने खेलने के लिए धीरे-धीरे अनुमति दी।
इससे पता चलता है कि क्रिकेट एक खेल नहीं है। सरकारें और बड़े अधिकारी अक्सर इसमें शामिल होते हैं।
बीसीबी अध्यक्ष ने निमंत्रण को ठुकरा दिया
पीसीबी अध्यक्ष के कोलंबो दौरे के बीच बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने भारत-पाक मैच देखने का न्योता ठुकरा दिया है।
बांग्लादेशी मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी टीम टी20 विश्व कप में नहीं भाग लेगी। ऐसे में उनका वहां होना अनुचित होगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी राष्ट्रीय टीम उनकी पहली प्राथमिकता है।
आईसीसी ने विशेष अनुरोध भेजा था। लेकिन वे नहीं चले। इस निर्णय ने फिर से बहस पैदा की है।
फिर बहस क्यों हो रही है?
कुछ लोगों का विचार है कि बीसीबी अध्यक्ष का यह निर्णय एक संकेत है। वे अपनी टीम को समर्थन देना चाहते हैं। वे किसी और टीम का मैच नहीं देखेंगे अगर उनकी टीम टूर्नामेंट में नहीं खेल रही है।
दूसरी ओर, कुछ लोगों का कहना है कि इससे टूर्नामेंट का वातावरण प्रभावित हो सकता है। ऐसे निर्णय बड़े खेल से पहले चर्चा में आते हैं।
मैदान पर खिलाड़ी पूरी तरह से तैयार हैं। वे इन बहसों से बचना चाहते हैं। खेल उनका सब कुछ है।
भारत-पाक युद्ध का महत्व
भारत और पाकिस्तान के बीच खेलने वाले हर खेल अलग होता है। यह सिर्फ रन और विकेट नहीं है। इसमें अतीत, भावनाएं और गर्व शामिल हैं।
ये दोनों टीमें एक दूसरे से मुकाबला करते हैं, तो टीवी की रेटिंग बढ़ जाती है। सोशल मीडिया पर बहुत चर्चा है। नौकरी छोड़कर लोग मैच देखने बैठ जाते हैं।
हर कोई इस मुकाबले को देखना चाहता है, चाहे बच्चे हों या बुजुर्ग। यही कारण है कि क्रिकेट में इस मैच को सबसे बड़ा मुकाबला कहा जाता है।
कोलंबो ने बहस का केंद्र बनाया
कोलंबो अभी चर्चा का विषय है। खिलाड़ियों के अलावा क्रिकेट बोर्डों के वरिष्ठ अधिकारी भी यहां आए हैं। होटल लॉबी में बैठकें होती हैं। सुरक्षा निकाय सावधान हैं।
आईसीसी अधिकारियों से नकवी की बैठक होगी। इन बैठकों में क्या फैसला होगा, इस पर सबका ध्यान है। क्या संबंधों में सुधार होगा? क्या ऐसे बहस अब कम होंगे?
फिर भी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन वातावरण में उत्साह जरूर है।
खिलाड़ियों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
खिलाड़ी अक्सर ऐसे विवादों से प्रभावित होते हैं। लेकिन दोनों टीमें इस बार पेशेवर तैयारी कर रही हैं। वे जानते हैं कि मैदान में खेल ही सब कुछ है।
खिलाड़ियों का मनोबल कोच और कप्तान बढ़ा रहे हैं। वे उनसे अनुरोध कर रहे हैं कि वे बाहरी चीजों पर ध्यान न दें। दर्शकों को अच्छा खेल दिखाना उनका लक्ष्य है।
गेंद मैदान पर फेंकी जाएगी तो यह सिर्फ क्रिकेट होगा।
आपका विचार क्या है?
Fan चाहते हैं कि मैच शांत हो। वे दिलचस्प खेल देखना चाहते हैं। राजनीति से अधिक खेल में रुचि है।
बहुत से प्रशंसकों का कहना है कि खेल को खेल के रूप में देखा जाना चाहिए। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि राजनीति और क्रिकेट को पूरी तरह से अलग करना मुश्किल है।
सोशल मीडिया पर विविध प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। नकवी की यात्रा को किसी ने सकारात्मक बताया है। बीसीबी अध्यक्ष की निर्णय को कोई नहीं मान रहा है।
क्या होगा?
अब मैच सबकी नजर है। क्या खेल ही इस मुकाबले को याद दिलाएगा? या फिर इससे जुड़े राजनीतिक मुद्दे भी चर्चा में रहेंगे?
आईसीसी अधिकारियों से मोहसिन नकवी की मुलाकात महत्वपूर्ण हो सकती है। बातचीत रिश्ते को भविष्य में बेहतर बना सकती है।
वहीं, अमीनुल इस्लाम बुलबुल का विरोध इस बात का संकेत है कि हर बोर्ड खुद निर्णय लेना चाहता है। वे अपनी टीम को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं।
उत्कर्ष
भारत और पाकिस्तान के बीच हर समय बड़ा मुकाबला होता है। लेकिन मैदान के बाहर की कहानी इस बार भी उतनी बड़ी है। पीसीबी अध्यक्ष कोलंबो पहुंचकर संबंधों को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। विपरीत, बीसीबी अध्यक्ष ने निमंत्रण को खारिज कर दिया है और एक अलग संदेश भेजा है।
क्रिकेट अब सिर्फ खेल नहीं है। इसमें भावना होती है। इसमें राजनीति है। बातचीत है। और आशा भी है।
फैंस चाहते हैं कि खेल अंत में विजेता हो। मैदान में खिलाड़ियों को अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए। और पूरी दुनिया एक शानदार प्रतिस्पर्धा देखेगी।
अब दोनों टीमें मैदान पर उतरेंगी। तब सब कुछ छूट जाएगा। साथ ही, बल्ला और गेंद वास्तविक कहानी लिखेंगे।