राफेल की बड़ी उड़ान: 114 नए जेट और 6 P-8I से और मजबूत होगी भारत की वायुसेना

भारत ने अपनी सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रक्षा खरीद परिषद ने 114 राफेल फाइटर जेट फ्रांस से खरीदने की अनुमति दी है। 6 P-8I एयरक्राफ्ट खरीदने को भी मंजूरी मिली है। इस निर्णय से देश की सीमाएं सुरक्षित होंगी और भारतीय वायुसेना की शक्ति बढ़ेगी। यह सौदा लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये का होगा। सरकार का कहना है कि आवश्यकतानुसार यह निर्णय लिया गया है।

114 राफेल जेट डील

गुरुवार को इस बड़े प्रस्ताव को रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने मंजूरी दी। अब फ्रांस की कंपनी डासॉल्ट एविएशन से बातचीत होगी। इसमें वाणिज्यिक और तकनीकी शर्तों पर चर्चा होगी।

यह सौदा इतना सरल नहीं है। यह समय लेगा। लेकिन अनुमोदन प्राप्त करना ही सबसे बड़ा कदम माना जाता है। 114 राफेल जेट भारतीय वायुसेना का आधार हो सकते हैं। ये जेट जल्दी चलते हैं। शक्तिशाली हैं। उन्हें आधुनिक हथियार मिल गया है।

राफेल ने भारत में पहले अपनी क्षमता दिखाई है। 2016 में भारत ने 36 राफेल जेट खरीद लिए थे। वे अब पूरी तरह से काम कर सकते हैं। जेट ने वायुसेना को मजबूत किया है। 114 और जेट जोड़ने से अब हथियारों की क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।

क्यों यह निर्णय महत्वपूर्ण है?

भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन की शक्ति इस समय 29 रह गई है। क्योंकि मंजूर संख्या 42 है। इसका अर्थ है कि कई स्क्वाड्रन अभी भी कम हैं।

पिछले कुछ सालों में पुराने विमान रिटायर हो चुके हैं। इससे संख्या घट गई है। नए, आधुनिक विमान वायुसेना को चाहिए।

हाल ही में पड़ोसी देशों के साथ तनाव बढ़ा है। सीमा पर परिस्थितियां निरंतर बदलती रहती हैं। इसलिए मजबूत वायुसेना बहुत महत्वपूर्ण है। सरकार का मानना है कि नए राफेल जेट इस कमी को भरेंगे।

पुराने बेड़े रिटायर हो रहे हैं

भारत ने सितंबर में अपने पुराने MiG-21 बेड़े को पूरी तरह से बंद कर दिया। यह विमान बहुत देर से सेवा में था। लेकिन वह अब बूढ़ा हो गया था।

MiG-29 के पहले संस्करण भी रिटायर होने के लिए तैयार हैं। जगुआर और मिराज 2000 भी सेवा से बाहर हो सकते हैं।

पुराने विमानों की शक्ति कम होती है जब नए विमान समय पर नहीं आते हैं। सरकार और वायुसेना दोनों इससे चिंतित हैं। इसलिए यह नवीनतम अधिनियम महत्वपूर्ण माना जाता है।

6 P-8I एयरक्राफ्ट भी शामिल होंगे

इस महत्वपूर्ण निर्णय में राफेल अकेला नहीं है। DAC ने भी 6 P-8I विमान खरीदने को मंजूरी दी है।

P-8I विमान समुद्री क्षेत्र की निगरानी करते हैं। ये बहुत दूर उड़ सकते हैं। दुश्मन के कामों पर नजर रख सकते हैं। भारतीय नौसेना पहले से ही इनका उपयोग करती है। अब छह और विमान शामिल होने से समुद्री सुरक्षा बढ़ी होगी।

भारत की समुद्री सीमा विस्तृत है। इसलिए निगरानी बहुत महत्वपूर्ण है। P-8I लगता है कि इस काम में सहायक होंगे।

मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा

सरकार केवल खरीद पर केंद्रित नहीं है। वह चाहती है कि भारत में अधिक से अधिक काम हों। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का लक्ष्य है कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दें।

पहले भारत ज्यादातर विदेशी हथियार और उपकरण खरीदता था। इससे अधिक समय लगता था और अधिक खर्च होता था। अब सरकार चाहती है कि भारत स्वयं निर्मित हो।

राफेल डील में भी यही प्रयास किया जाएगा। समाचारों के अनुसार, फ्रांस से कुछ जेट तैयार हालत में आएंगे। फ्लाई-अवे कंडीशन इनका नाम है। भारत में अतिरिक्त जेट बनाए जा सकते हैं। भारतीय कंपनियां भी सहयोग करेंगे। इससे अधिक काम मिलेगा। देश में भी तकनीक आएगी।

तेजस फाइटर जेट का कार्य

1980 के दशक में भारत ने स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने का प्रयास शुरू किया था। लंबे इंतजार के बाद वायुसेना में तेजस फाइटर जेट शामिल हुआ।

MiG-21 जैसे पुराने विमानों की जगह तेजस ले रहा है। HAL, या हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, को 180 तेजस Mk-1A का ऑर्डर मिल गया है।

लेकिन यहाँ एक समस्या है। GE Aerospace इंजनों की सप्लाई देरी से हो रही है। इसलिए डिलीवरी शुरू नहीं हुई है। इसलिए वायुसेना को इंतजार करना होगा।

सरकार तेजस और राफेल को मिलाकर वायुसेना को मजबूत करना चाहती है। एक देशवासी है। दूसरा विदेशी जेट नवीनतम और सुसज्जित है। दोनों मिलकर बल बढ़ा सकते हैं।

राफेल की क्या विशेषता है?

Rafale एक multi-roll फाइटर जेट है। इसका अर्थ है कि यह कई कार्य कर सकता है। यह हवाई संघर्ष कर सकता है। भूमिगत हमला कर सकता है। उड़ान भर सकता है।

इसमें आधुनिक मिसाइल सिस्टम और रडार लगाए गए हैं। हर मौसम में इसका काम चल सकता है। यह मिशन दिन या रात पूरा कर सकता है।

भारतीय वायुसेना के पायलटों ने पुराने 36 राफेल जेट की प्रशंसा की है। उनका दावा है कि यह जेट भरोसेमंद और तेज है।

क्या होगा?

मंजूरी के बाद बातचीत होगी। भारत और फ्रांस के बीच निर्माण, डिलीवरी, कीमत और तकनीक पर व्यापक चर्चा होगी।

यह बड़ा सौदा समय लेता है। हर परिस्थिति को गहनता से जाँच किया जाता है। सरकार चाहती है कि देश एक बेहतर सौदा प्राप्त करे।

अगर सब कुछ योजनानुसार काम करता है, तो आने वाले सालों में वायुसेना में नए जेट शामिल होने लगेंगे। इससे स्क्वाड्रन क्रमशः बढ़ेगा।

रणनीतिक ताकत बढ़ेगी

114 राफेल जेट भारत में शामिल होने से देश की हवाई शक्ति में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। इससे वायुसेना कई लक्ष्यों पर एक साथ काम कर सकेगी।

यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। आधुनिक जेट की तरह तैयार होना बेहतर है। जवाब देने की क्षमता में वृद्धि होती है।

पड़ोसी देशों की कार्रवाई को देखते हुए, मजबूत वायुसेना बहुत महत्वपूर्ण है। सरकार का कहना है कि यह डील भविष्य को देखते हुए की गई है।

उत्कर्ष

भारत ने 114 राफेल और 6 P-8I विमानों की मंजूरी देकर स्पष्ट रूप से अपनी सुरक्षा पर गंभीर है। वायुसेना में स्क्वाड्रन संख्या की कमी चिंता का विषय बन गई। अब यह नई डील उस कमी को पूरा करेगी।

साथ ही, मेक इन इंडिया को बढ़ाना जारी है। सरकार चाहती है कि भारत निर्माता और खरीदार बने।

यह सौदा भारतीय रक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन सकता है। देश की सीमाएं बलवती होंगी। भारत की शक्ति आसमान में उड़ान भरेगी।

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