दिल्‍ली को नजरअंदाज करना भारी पड़ेगा: भारत जैसी ताकतों के बिना नई विश्व व्यवस्था अधूरी

दुनिया की राजनीति में एक बार फिर एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। नए विचार आते हैं और पुराने नियम बदलते हैं। इस बदलाव के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने क्या कहा? उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि दुनिया अब केवल अमेरिका की मदद से नहीं चल सकती। भारत जैसे देशों की भूमिका बढ़ गई है। उन्हें नजरअंदाज करना बड़ी गलती होगी।

कार्नी ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व इकोनॉमिक फोरम के मंच से जो कहा, उसने कई देशों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उनका भाषण आसान था, लेकिन बहुत गहरा था। उनका कहना था कि वर्तमान व्यवस्था कमजोर हो रही है और एक नई व्यवस्था की जरूरत है। भारत, चीन और अन्य उभरते देशों को इस नई व्यवस्था में शामिल होना चाहिए।

दावोस ने महत्वपूर्ण सन्देश भेजा

बड़े विचारों के लिए दावोस का मंच हमेशा से जाना जाता है। कनाडा के प्रधानमंत्री का भाषण इस बार सबसे अलग था। उन्हें लगता था कि अमेरिका ने दशकों से दुनिया की अगुवाई की है। कई नियम बनाए गए हैं। बहुत से समझौते हुए। लेकिन यह व्यवस्था अब गिर रही है। यह बदलाव तेजी से हो रहा है, नहीं धीरे-धीरे हो रहा है।

कार्नी ने कहा कि अमेरिका के निर्णय पूरी दुनिया पर प्रभाव डालते हैं। छोटे और मध्यम देशों को नुकसान होता है, चाहे वह टैरिफ बढ़ाना हो या किसी देश पर दबाव डालना हो। उनमें से कुछ ने इशारों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की आलोचना की। खासकर व्यापार और सुरक्षा क्षेत्र में।

अमेरिकी नेतृत्व पर प्रश्नचिन्ह

कार्नी ने कहा कि अब नियमों से अधिक शक्ति है। शक्तिशाली देश अपने लाभ के अनुसार निर्णय लेते हैं। उन्हें कमजोर देशों को मानना पड़ रहा है। यह हालात खतरनाक है। इससे विश्व में असंतुलन पैदा होता है।

उनका स्पष्ट मत था कि छोटे और मध्यम देशों को सिर्फ कानूनों का पालन करने से सुरक्षित रहेंगे। ऐसा अब नहीं होगा। अकेले रहने पर एक देश को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए एक साथ आना महत्वपूर्ण है।

भारत का विशिष्ट उल्लेख

मार्क कार्नी ने अपने भाषण में बार-बार भारत का नाम लिया। उनका कहना था कि भारत जैसी मध्यम शक्तियां अब सिर्फ देख रहे हैं। उन्हें आगे आकर अपना काम करना होगा। इसकी विशिष्टता भारत की जनसंख्या, अर्थव्यवस्था और बढ़ते वैश्विक प्रभाव से मिलती है।

साथ ही उन्होंने कहा कि दिल्ली को नजरअंदाज करना बहुत गलत होगा। आज भारत एक देश नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण साझेदार है। भारत का व्यापार, कूटनीति और तकनीक क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा है। भारत को नई विश्व व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान मिलना चाहिए।

चीन की भूमिका

कार्नी ने अपने भाषण में चीन और दक्षिण अमेरिका भी कहा। उनका कहना था कि मर्कोसुर, चीन और भारत को अलग करना सही नहीं है। यूरोपीय संघ के साथ भी संतुलन बनाना आवश्यक है।

उन्हें लगता है कि आज की दुनिया में एक देश पर निर्भर रहना खतरनाक है। देशों को अब एक नेटवर्क बनाना चाहिए। एक ऐसा जाल, जिसमें कई देश एक-दूसरे का साथ देते हैं।

मध्यम वर्ग को एकजुट होना चाहिए

कनाडा के प्रधानमंत्री ने अक्सर “मध्यम शक्तियों” शब्द का उपयोग किया। यह उन देशों से संबंधित है जो बड़े नहीं हैं लेकिन कमजोर भी नहीं हैं। भारत भी इसी सूची में आता है। उनका कहना था कि बड़ी ताकतें अकेले चल सकती हैं, लेकिन मध्यम ताकतें ऐसा नहीं कर सकती।

ये देश फैसलों की मेज पर नहीं बैठेंगे अगर वे एकजुट नहीं होंगे। और अगर वे मेज पर नहीं होंगे, तो दूसरे फैसले करेंगे। किसी भी देश के लिए यह स्थिति अच्छी नहीं है।

द्विपक्षीय वार्तालाप की चेतावनी

कर्नी ने यह भी कहा कि शक्तिशाली देशों के साथ अकेले बातचीत करना अक्सर घातक होता है। ऐसी बातचीत में संप्रभुता अक्सर सिर्फ दिखाई देती है। असल में, एक कमजोर देश को दबाव का सामना करना पड़ता है।

उनका कहना था कि बहुत से देश मिलकर बात करेंगे तो उनकी आवाज मजबूत होगी। इससे संतुलन बना रहता है और एक देश का दबदबा नहीं रहता है।

कनाडा की परिवर्तित नीति

मार्क कार्नी सिर्फ भाषण नहीं दे रहे हैं; वे कार्यस्थल पर भी हैं। उनका कहना था कि कनाडा अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। इसके लिए वह नए सहयोगी खोज रहा है।

भारत के साथ कनाडा वर्तमान में एक मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा कर रहा है। यह एक महत्वपूर्ण प्रगति है। दोनों देशों को इससे लाभ होगा। व्यापार होगा। नौकरी के नए अवसर पैदा होंगे।

भारत से संबंधों पर जोर

कार्नी ने कहा कि भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना कनाडा की पहली प्राथमिकता है। उनका कहना था कि कनाडा भी आसियान, थाईलैंड, फिलीपींस और दक्षिण अमेरिकी देशों से बातचीत कर रहा है। यह एक संतुलित और सुरक्षित भविष्य बनाना चाहता है।

उन्हें यह भी बताया कि कनाडा ने हाल ही में चीन और कतर के साथ एक नई रणनीतिक साझेदारी की है। यह बताता है कि कनाडा अब बहुआयामी सोच करता है।

वर्तमान विश्व व्यवस्था का चित्र

कार्नी ने कहा कि नई दुनिया में कोई नेता नहीं होगा। कई देश मिलकर काम करेंगे। यह प्रणाली अधिक न्यायपूर्ण होगी। यह छोटे देशों को भी देखेगा।

उनका कहना था कि दुनिया की समस्याएं अब एक देश से हल नहीं होंगी। व्यापार, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन सब पर एकजुट होना चाहिए।

भारत का महत्व

भारत यह बयान महत्वपूर्ण मानता है। यह बताता है कि दुनिया अब भारत को महसूस कर रही है। अब भारत की सोच, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

भारत नई विश्व व्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा सकता है अगर वह सही काम करता है। यह आपकी आवाज को मजबूत करने का अवसर है।

उत्कर्ष

दावोस ने स्पष्ट संदेश भेजा था। दुनिया परिवर्तित हो रही है। पुराने नियम नहीं चल रहे हैं। भारत जैसे देशों को ऐसे समय में आगे आना होगा। कनाडा के प्रधानमंत्री का बयान एक चेतावनी है।

मध्यम शक्तियां एकजुट होने से फैसले दूसरे लेंगे। लेकिन वे मिलकर एक नई और बेहतर विश्व व्यवस्था बना सकते हैं। भारत की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है।

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