ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नजर: रूस-चीन से बचाने को अमेरिका खरीदेगा या कब्जा करेगा?

शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीबीसी से कहा ग्रीनलैंड पर मालिकाना हक चाहिए, उन्होंने कहा। लीज समझौता पर्याप्त नहीं है। ट्रंप ने कहा कि देश मालिकाना हक की रक्षा करता है, लीज की नहीं। वे चाहते हैं कि अमेरिका इसे हल्का या कठिन बनाए।

व्हाइट हाउस ने हाल ही में इस विषय पर विचार किया। वे इसे डेनमार्क में खरीद सकते हैं। या बलपूर्वक ले सकते हैं। लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड कहते हैं यह बिक्री के लिए नहीं बनाया गया है। डेनमार्क ने सुझाव दिया। सैन्य कार्रवाई नेटो को समाप्त कर देगी।

पत्रकारों को ट्रंप ने बताया। नौ वर्ष या सौ वर्ष का समझौता नहीं चलेगा। हम ओनरशिप चाहते हैं।चीन और रूस के लोग उनसे खुश हैं। लेकिन ग्रीनलैंड में पड़ोसी के रूप में नहीं चाहते हैं। नेटो भी इस बात को समझना होगा, उनने जोड़ा।

ग्रीनलैंड की खासियत क्या है?

दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है ग्रीनलैंड। 21 लाख वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र इसका है। लेकिन सिर्फ 57 हजार लोग रहते हैं। ज्यादातर बर्फ है। 80 प्रतिशत बर्फ है। यह आर्कटिक और उत्तर अमेरिका के बीच है।

मिसाइल हमले में यह अत्यंत आवश्यक है। यह एक त्वरित चेतावनी दे सकता है। Trump कहते हैं यह संयुक्त राज्य अमेरिका की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। बिना किसी प्रमाण के बोलें। रूसी और चीनी जहाजों की भरमार है।

US पहले से ही पिटुफिक बेस है। दक्षिण-पश्चिम में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 100 से अधिक सैनिक तैनात हैं। डेनमार्क से अनुबंध है। जितने सैनिक चाहें ला सकते हैं। लेकिन ट्रंप को लीज अच्छी नहीं लगती।

संसाधनों का संघर्ष

ग्रीनलैंड में खजाने की बहुतायत है। रेयर का मतलब मिनरल्स है। यूरेनियम और आयरन गैस और तेल के भंडार भी हो सकते हैं। जलवायु परिवर्तन बर्फ पिघलने का कारण है। पहुँच सरल थी।

मिशिगन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एडम सिमोन ने कहा यहाँ दुनिया का चौथाई हिस्सा हो सकता है। करीब १५ लाख टन चीन इनमें सर्वश्रेष्ठ है। दुनिया को नियंत्रित करता। ग्रीनलैंड की खनन कंपनियों में निवेश करना

चीनी कंपनियां हवाई अड्डे बनाने के लिए उत्सुक हैं। कम-से-कम दो लेकिन यूएस के दबाव से नहीं बन गया। चीन को अमेरिका का दुश्मन मानता है। ग्रीनलैंड एक नया क्षेत्र है। रूस भी देख रहे थे।

नेटो देशों में आक्रोश

नेटो के सहयोगी देश असहज हैं। डेनमार्क के सहयोगी ने बात की। कनाडा भी ऐसा ही कहा। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ही निर्णय करें। हम भी आर्कटिक को बचाना चाहते हैं। सब लोग मिलकर काम करेंगे।

उनके पास संयुक्त राष्ट्र के कानून थे। संप्रभुता, सीमाओं का शुद्धीकरण ट्रंप के वेनेजुएला फैसले ने चिंता बढ़ा दी है। वहां मादुरो को पकड़ने की सैन्य कोशिश ग्रीनलैंड को भय हुआ।

2019 में ट्रंप ने पहली बार प्रस्ताव रखा था। उसने फिर भी इनकार कर दिया। अब विदेश मंत्री मार्को रूबियो डेनमार्क जाएगा। आप बातचीत करेंगे। पिछले महीने ट्रम्प ने एक दूत भेजा था। :22 दिसम्बर को ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा होगा, उन्होंने कहा।

ग्रीनलैंड, डेनमार्क पर निर्भर

ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक भाग है। डेनमार्क राज्य कई प्रकार की स्वतंत्रता अर्थव्यवस्था डेनमार्क की सहायता में। सब्सिडी दी जाती है। कम आबादी जीवन मुश्किल है। लेकिन संसाधन अच्छे हैं।

ट्रंप सरकार की कार्रवाई से डेनमार्क गुस्सा है। भी यूरोपीय संघ। कहते हैं ग्रीनलैंड बेचा नहीं जाएगा। सबकी सुरक्षा अमेरिका की है। नेटो के साथ।

ट्रंप के पुराने प्रयास

Trump ने अपने पहले कार्यकाल में भाषण दिया। ग्रीनल्याण्ड खरीदें। डेनमार्क ने इनकार कर दिया। फिर जोर रूस और चीन ने भय दिखाया। जहाजों की चर्चा। बिना किसी प्रमाण के पिटुफिक पहले से ही है। लेकिन मालिकाना हक चाहिए।

Trump कहते हैं आसान या कठिन। मतलब स्पष्ट है। खरीदें या जबरदस्ती करो। सब लोग देख रहे हैं। नेटो गिर जाएगा क्या?

भविष्य के बारे में चिंताएं

चीन, रूस और अमेरिका का संघर्ष ग्रीनलैंड बीच में फंसा हुआ था। सामग्री, सुरक्षा। सब कुछ दांव पर है। डेनमार्क दृढ़ता से खड़ा है। नेटो के साथ लेकिन ट्रंप ने नहीं रुका। Roboo बातचीत महत्वपूर्ण है।

वेनेजुएला की घटना का भय विश्वव्यापी चिंता है। क्या संयुक्त राष्ट्र के कानूनों को तोड़ा जाएगा? क्या आर्टिक सुरक्षित होगा? प्रश्न उठाए गए। ग्रीनलैंड के लोग क्या कहेंगे? यह समय ही बताएगा।

ग्रीनलैंड के बारे में दिलचस्प जानकारी

क्षेत्रफल: २१ लाख वर्ग किमी

शहर: सिर्फ पच्चीस हजार

शीतल: 80 प्रतिशत भाग

संसाधनों: रेयर अर्थ, यूरेनियम, गैस और तेल।

विशिष्टता: मिसाइल चेतावनी के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान

यह ट्रंप की पहली जिद है। लेकिन यह अब गंभीर दिख रहा है। ग्रीनलैंड दुनिया की दृष्टि में। रूस-चीन-अमेरिका का संघर्ष जारी रहेगा। डेनमार्क अकेले संघर्ष नहीं करेगा। नेटो सहयोग करेगा।

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