आंध्र प्रदेश में ONGC के कुओं से गैस लीक का हड़कंप: लोग घर छोड़ भागे, सुरक्षा पर उठे सवाल

आंध्र प्रदेश के अंबेडकर कोनासीमा जिले में बुधवार की रात अचानक हड़कंप मच गया, जब तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) के एक कुएं से भारी मात्रा में गैस लीक होने लगी। यह घटना ममिडिकुडुरु मंडल के पसारलापुडी गांव में हुई, जो अमलापुरम से करीब 12 किलोमीटर दूर है। रात के समय हुई इस गैस लीकेज से आस-पास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई।

स्थानीय लोगों ने बताया कि पूरे क्षेत्र में एक अजीब-सी गंध फैल गई, और हवा में धुंध जैसा गैस का गुबार दिखाई देने लगा। लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित जगहों की ओर भागने लगे। कई लोग अपने मवेशियों को भी साथ लेकर भागे ताकि कोई अनहोनी न हो। जिला प्रशासन और ONGC की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और स्थिति को संभालने की कोशिश करने लगीं।

कैसे हुआ हादसा?

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसा उस समय हुआ जब ONGC की टीम कुआं संख्या 21 में पुनः ड्रिलिंग (रीड्रिलिंग) का काम कर रही थी। मरम्मत के दौरान कुएं से अचानक तेज दबाव की गैस बाहर निकलने लगी। कुछ ही सेकंड में गैस का एक बड़ा जेट लगभग 20 मीटर तक ऊपर उठ गया, जिससे पूरा इलाका गैस के धुएं से भर गया।

डीजल और कच्चे तेल के मिश्रण के साथ लीक हुई गैस में आग लगने का खतरा सबसे बड़ा था। राहत की बात यह रही कि वहां मौजूद दमकल कर्मियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और आग फैलने से रोक लिया। ONGC की आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम ने भी तुरंत पहुंचकर गैस लीकेज को नियंत्रित किया।

लोगों में डर और चिंता

लेक के बाद आस-पास के ग्रामीणों में दहशत फैल गई। कई लोगों ने अपने घर खाली कर दिए और बच्चे-बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। प्रशासन ने इलाके में बिजली बंद कर दी ताकि कोई चिंगारी न उठे। लोगों को सलाह दी गई कि वे गैस स्टोव या किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रिक उपकरण चालू न करें।

स्थानीय निवासी लक्ष्मी और रमेश ने बताया कि उन्होंने पहले भी ऐसी घटनाओं के बारे में सुना था, पर इस बार जब अपने गांव के पास गैस का बादल देखा, तो वास्तव में डर लगने लगा। उन्होंने कहा कि “हम डर के मारे खेतों में भाग गए। बच्चे भी रोने लगे थे।”

प्रशासन ने संभाले हालात

जिले के अधिकारियों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए। फायर ब्रिगेड, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और ONGC की टीमें मौके पर पहुंचीं। पूरे इलाके को घेर लिया गया ताकि कोई व्यक्ति प्रभावित क्षेत्र में न जा सके।

अग्निशमन विभाग के निरीक्षक हनुमंत राव ने बताया कि ONGC की टीम ने गैस के दबाव को नियंत्रित कर लिया है, और अब स्थिति सामान्य हो रही है। उन्होंने कहा, “आगे किसी भी प्रकार का जोखिम न हो, इसके लिए सभी कुओं की सुरक्षा जांच की जाएगी। ड्रिलिंग तभी शुरू होगी जब सभी सुरक्षा मानकों को पूरा कर लिया जाए।”

ग्रामीणों की मांग: सख्त सुरक्षा नियम बनें

घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा भी दिखा। ग्रामीणों ने कहा कि ONGC का काम अब उनके लिए डर का कारण बन गया है। उन्होंने मांग की कि सरकार और कंपनी मिलकर क्षेत्र में सख्त सुरक्षा नियम लागू करें ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्थानीय नेता और सामाजिक कार्यकर्ता जगन्नाथ रेड्डी ने कहा, “यह पहली बार नहीं है। पिछले साल भी इसी तरह का गैस रिसाव हुआ था जिससे लोग बीमार पड़ गए थे। अगर कंपनी सुरक्षा पर ध्यान नहीं देगी तो लोग आंदोलन करेंगे।”

पहले भी हो चुके हैं हादसे

यह कोई पहली बार नहीं है जब आंध्र प्रदेश के कोनासीमा या इससे जुड़े इलाकों में ऐसी घटना हुई हो। मार्च में इसी जिले के केसनपल्ली गैस संग्रहण केंद्र में हाइड्रोजन सल्फाइड गैस लीक हुई थी। उस घटना में नौ कर्मचारी और एक चार वर्षीय बच्चा बीमार पड़ गए थे। बाद जांच में पाया गया कि गैस लीक का कारण खराब रखरखाव और सूक्ष्मजीवों का जमाव था।

इसी तरह, राजोल क्षेत्र के इरुसुमंडा गांव में भी कुछ समय पहले ONGC के तेल कुएं से गैस लीक हुई थी। उस समय भी मरम्मत के दौरान एक जोरदार धमाका हुआ था और हवा में गैस का बादल बन गया था। वहां भी स्थानीय लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे।

प्रशासन की सतर्कता और हाई अलर्ट

अब जिला प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। टीमों को हर समय तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। ONGC अधिकारियों ने भी कहा है कि सभी कुओं की तकनीकी जांच की जाएगी।

राज्य के पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि “लोगों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। हम सुनिश्चित करेंगे कि इस बार कारणों की पूरी जांच हो और ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।”

ONGC की प्रतिक्रिया

ONGC के प्रवक्ता ने मीडिया को बताया कि यह एक तकनीकी गड़बड़ी थी, जिसे समय पर नियंत्रित कर लिया गया। उन्होंने कहा कि ONGC अपने कर्मचारियों और जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। कंपनी ने अंदरूनी जांच शुरू कर दी है और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही है।

प्रवक्ता ने आगे कहा कि “हमारी टीमें चौबीसों घंटे काम कर रही हैं ताकि लीक को पूरी तरह रोका जा सके और भविष्य में ऐसे हादसे न हों। सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है, और हम इसे गंभीरता से लेते हैं।”

गैस लीक के पीछे की तकनीकी वजहें

विशेषज्ञों का कहना है कि गैस लीक के पीछे अक्सर दबाव नियंत्रण में गड़बड़ी या पुराना उपकरण कारण होता है। जैसे-जैसे कुओं की उम्र बढ़ती है, उनके वाल्व और पाइपलाइन कमजोर हो जाते हैं। अगर समय पर उनका रखरखाव या मरम्मत न हो, तो गैस दबाव के कारण बाहर निकल सकती है।

इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि आस-पास के लोगों की जान को भी खतरा होता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने वीडियो और फोटो साझा करने शुरू कर दिए। कई क्लिप्स में गैस का सफेद गुबार और लोगों की भागदौड़ देखी जा सकती है। ट्विटर (अब एक्स) और फेसबुक पर #ONGCGasLeak और #KonaseemaTrending जैसे हैशटैग वायरल हो गए।

लोगों ने प्रशासन से सवाल किए कि जब पहले भी ऐसी घटनाएं हुईं, तो सुरक्षा उपायों को लेकर इतना लापरवाह रवैया क्यों अपनाया गया।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

इन हादसों का असर सिर्फ डर तक सीमित नहीं है। प्रभावित गांवों में किसान और मछुआरे दोनों ही अपने काम से रुक गए हैं। खेतों में गैस के कारण बदबू और प्रदूषण फैल गया है। लोग बता रहे हैं कि फसल और जलस्रोत पर भी असर पड़ सकता है।

एक मछुआरे ने कहा, “हम अब तालाबों या पास की नदियों में मछलियां पकड़ने नहीं जा रहे। जब तक हमें भरोसा नहीं होगा कि पानी सुरक्षित है, हम वापसी नहीं करेंगे।”

भविष्य में क्या करेंगे अधिकारी?

इस घटना के बाद अब केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांगी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने ONGC से पूरे क्षेत्र में सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट जमा करने को कहा है। साथ ही, राज्य सरकार ने विशेषज्ञ टीमों को निरीक्षण के लिए भेजा है।

पर्यावरण विभाग ने कहा कि गैस लीक का असर पसारलापुडी, अमलापुरम और आसपास के गांवों के वायु गुणवत्ता स्तर पर पड़ा है। अब अगले कुछ सप्ताह तक इन इलाकों की निगरानी की जाएगी।

लोगों में उम्मीद और भरोसा

हादसे के बाद जहां डर का माहौल बना है, वहीं लोगों को उम्मीद भी है कि इस बार प्रशासन कुछ ठोस कदम उठाएगा। कई परिवार अब धीरे-धीरे अपने घर लौटने लगे हैं। बच्चे स्कूल जाने लगे हैं और दुकाने भी खुल रही हैं, लेकिन मन में अभी भी हल्का डर है।

स्थानीय महिला सुशीला का कहना है, “हमें भरोसा है कि सरकार अब गंभीरता से काम करेगी। हम सुरक्षित रहना चाहते हैं, क्योंकि अब बार-बार ऐसे हादसों से डर लगने लगा है।”

निष्कर्ष

आंध्र प्रदेश का यह हादसा एक चेतावनी है कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के साथ सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जा सकती। जब तक तकनीकी सतर्कता और जनसुरक्षा दोनों को बराबर प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे।

ONGC जैसी संस्थाओं के लिए यह समय है कि वे अपने सिस्टम को नई तकनीक से लैस करें और ग्रामीणों के बीच भरोसा बहाल करें। तभी विकास और सुरक्षा एक साथ चल सकते हैं।

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