आज दुनिया बदल रही है। प्रमुख देशों ने अपने फायदे देखकर निर्णय ले रहे हैं। जब टैरिफ बढ़ रहे हैं, तो व्यापार भी कम हो जाता है। ऐसे हालात में भारत और यूरोपीय संघ ने बड़ा और प्रभावशाली कदम उठाया है। दोनों ने आखिरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर काफी समय से बातचीत की है। इस अनुबंध को “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स” कहा जाता है। इसका अर्थ है कि यह सिर्फ एक समझौता नहीं है, बल्कि कई मायनों में एक ऐतिहासिक निर्णय है।
यह समझौता तब हुआ है जब दुनिया भर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से अनिश्चितता है। व्यापार तनाव कई देशों में बढ़ा है। ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ का समझौता विश्व को स्पष्ट संदेश देता है। यह दिखाता है कि व्यापार और बातचीत ही आगे का रास्ता है, टैरिफ नहीं।
भारत-ईयू समझौता की विशिष्टता
भारत और यूरोपीय संघ पहले से ही व्यापार में अग्रणी हैं। दोनों वर्षों से व्यापार कर रहे हैं। लेकिन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर लंबे समय से चर्चा नहीं हुई थी। दोनों पक्षों को खुशी है कि बातचीत अब समाप्त हो गई है।
इस समझौते से भारत को यूरोप के महत्वपूर्ण बाजार तक आसानी से पहुंच मिलेगी। साथ ही यूरोपीय संघ को भारत जैसे तेजी से विकसित देश में नए अवसर मिलेंगे। यह डील व्यापार को बढ़ावा देगी। साथ ही, यह रोजगार और निवेश के नए रास्ते भी खोलेगी।
एंटोनियो कोस्टा की स्पष्ट चेतावनी
इस अधिनियम को लेकर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने बड़ा बयान दिया है। उन्हें लगता था कि यह समझौता संरक्षणवाद और बढ़ते टैरिफ के खिलाफ एक मजबूत राजनीतिक संदेश है। उनका कहना है कि नियमों पर आधारित व्यापार अभी भी संभव है।
कोस्टा ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने विश्व भर में अस्थिरता बढ़ा दी है। कई देश भयभीत हैं। इसलिए भारत और यूरोपीय संघ का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्थिरता और विश्वास की ओर बड़ा कदम है।
भारत और यूरोपीय संघ की विश्वव्यापी नजदीकी
एंटोनियो कोस्टा का विचार है कि दुनिया आज बहुध्रुवीय हो गई है। इसका अर्थ है कि दुनिया को अब केवल एक या दो देश नहीं चलाते। कई शक्तियां हैं। ऐसे में यूरोपीय संघ और भारत को और करीब आना चाहिए।
उनका कहना था कि भारत और यूरोपीय संघ मिलकर अंतरराष्ट्रीय संबंधों को सुधार सकते हैं। दोनों नियम विश्व व्यवस्था की रक्षा कर सकते हैं। यह केवल व्यापार नहीं है। यह भी सुरक्षा और विश्वास की बात है।
गणतंत्र दिवस का विशिष्ट अवसर
एंटोनियो कोस्टा भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने पर यह डील चर्चा में आई। उनके साथ यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी थीं। दोनों को मुख्य अतिथि का आमंत्रण मिला।
इस अवसर ने यूरोपीय संघ और भारत के संबंधों को और अधिक मजबूत किया। यह बताता है कि दोनों रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार बनना चाहते हैं।
क्यों इसे “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स” कहा जाता है?
भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार यूरोपीय संघ है। इसलिए इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का इतना बड़ा नाम है। EU अध्यक्ष ने खुद इसे “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स” बताया।
माना जाता है कि ट्रंप के टैरिफ से प्रभावित क्षेत्रों को इस समझौते से सबसे अधिक लाभ होगा। कंपनियों को इससे राहत मिलेगी और व्यापार चलेगा।
मात्र आर्थिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक समझौता
एंटोनियो कोस्टा ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह सौदा सिर्फ व्यापार और पैसे तक नहीं सीमित है। यह भू-राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। आज, जब कई देश अपने लाभ के लिए नियम तोड़ रहे हैं, यह समझौता दिखाता है कि नियमों का पालन कैसे किया जा सकता है।
उनका कहना था कि यह समझौता दुनिया को स्थिर करेगा। इससे भरोसा पैदा होगा। यह विश्वव्यापी व्यापार को सुरक्षित रखने की क्षमता को दिखाएगा।
ट्रेड पर भरोसा, टैरिफ नहीं
इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है। भारत और यूरोपीय संघ टैरिफ की जगह ट्रेड पर निर्भर हैं। यह डील उलट जाती है जब कई देश टैरिफ बढ़ा रहे हैं।
कोस्टा का कहना है कि यह दुनिया को दिखाता है कि बातचीत और सहमति से भी आगे बढ़ सकते हैं। दीवारें बनाना हर समस्या का समाधान नहीं है।
भारत-ईयू व्यापार के वर्तमान आंकड़े
आंकड़ों की बात करें तो भारत और यूरोपीय संघ का व्यापार पहले से ही मजबूत है। दोनों वर्ष 2024–25 में वस्तुओं का व्यापार 136.53 अरब डॉलर हुआ। भारत का निर्यात इसमें 75.85 अरब डॉलर था। आयात 60.68 अरब डॉलर था।
दोनों ने सेवा क्षेत्र में भी अच्छा कारोबार किया है। 2024 में सेवा व्यापार 83.10 अरब डॉलर था। ये आंकड़े रिश्ते की गहराई को दिखाते हैं।
वर्तमान टैक्स लागत
फिलहाल, भारतीय उत्पादों पर यूरोपीय संघ में औसतन 3.8 प्रतिशत टैक्स लगता है। लेकिन श्रम आधारित क्षेत्रों में यह टैक्स 10% तक हो सकता है। यह भारतीय कंपनियों पर अधिक बोझ डालता है।
EU से आने वाले सामानों पर भारत में 9.3 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है। कार और उनके पुर्जों पर 35 प्रतिशत तक की कर लगाई जाती है। प्लास्टिक पर 10.4 प्रतिशत टैक्स लगाया गया है, जबकि केमिकल और दवाओं पर करीब 9.9 प्रतिशत लगाया गया है।
FTA से क्या होगा
स्थिति बदल सकती है जब इस साल के अंत तक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर होंगे। कई वस्तुओं पर टैक्स कम होगा या हट जाएगा। इससे मांग बढ़ेगी और सामान सस्ता होगा।
भारतीय कंपनियों को यूरोप में अपनी वस्तुओं को बेचना आसान होगा। वहीं यूरोपीय निगम भारत में अधिक निवेश कर सकेंगे।
किन क्षेत्रों को लाभ मिलेगा?
खासतौर पर श्रम आधारित क्षेत्रों को इस समझौते से लाभ मिलेगा। कपड़ा उद्योग को नया बल मिलेगा। रत्न, आभूषण और केमिकल उद्योग भी सुधरेंगे।
इलेक्ट्रिक मशीनरी, लेदर और फुटवियर जैसे क्षेत्रों में भी नए मौके पैदा होंगे। इससे अधिक रोजगार मिलेगा। यह छोटे कारोबारियों को भी मिलेगा।
भारत के लिए यह डील महत्वपूर्ण क्यों है?
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो रही है। उसे नए बाजार की आवश्यकता है। यूरोपीय बाजार मजबूत और बड़ा है। इस डील से भारत को वहां अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
इसके साथ ही भारत खुले व्यापार पर अपना विश्वास दिखा सकेगा। यह भी उसकी विश्वव्यापी छवि को मजबूत करेगा।
EU के लिए भारत का महत्व क्यों?
भारत यूरोपीय संघ का एकमात्र बाजार नहीं है। भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। यहाँ अधिकांश लोग युवा हैं। यहाँ मांग बढ़ी है। EU कंपनियों के पास शानदार अवसर है।
इस डील से यूरोपीय संघ की एशिया में मौजूदगी मजबूत होगी।
भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम
आने वाले समय में भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बहुत कुछ बदल सकता है। इससे व्यापार आसान होगा। रिश्तों को बढ़ा देगा। साथ ही यह विश्व को सकारात्मक संदेश देगा।
भारत और यूरोपीय संघ ने भरोसे और सहयोग का रास्ता चुना है जब दुनिया भर में टैरिफ और संघर्ष की चर्चा हो रही है। इस “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील” की सबसे बड़ी शक्ति यही है।