आज महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण दिन है। सत्ता के गलियारों में बातचीत हो रही है। मुंबई से बारामती तक बहस जारी है। सुनेत्रा पवार है कारण। माना जाता है कि आज शाम वे शपथ लेकर इतिहास बनाएंगे। अगर सब कुछ ठीक होता है, तो वे महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री होंगी। यात्रा सरल नहीं रही। यह एक महिला की कहानी है जो लंबे समय तक परदे के पीछे रहती थी, लेकिन जब समय आया, तो सामने आकर नेतृत्व करने को तैयार दिखीं।
अजित पवार के बाद राजनीतिक चित्र बदल गया
महाराष्ट्र की राजनीति में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार के अचानक निधन से व्यापक खालीपन पैदा हुआ। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में तेजी से बैठकें हुईं। पार्टी को एक जिम्मेदार व्यक्ति की जरूरत थी जो संगठन पर नियंत्रण रख सकता था। तब सुनेत्रा पवार का नाम सामने आया।
पार्टी के सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व को लेकर बहुत मतभेद नहीं है। उन्हें इस पद के लिए अजित पवार की राजनीतिक विरासत और सुनेत्रा पवार की सामाजिक प्रतिष्ठा ने मजबूत दावेदार बनाया।
एनसीपी विधायक दल का महत्वपूर्ण सम्मेलन
शपथ ग्रहण से पहले एनसीपी विधायक दल की बैठक विधान भवन में बुलाई गई थी। इस बैठक में सुनेत्रा पवार को नेता चुने जाने की योजनाएं पूरी हो गईं। विधानसभा सचिवालय को वरिष्ठ नेताओं ने औपचारिक पत्र भेजा। जबकि बैठक का वातावरण गंभीर था, फैसला लगभग तय था।
पार्टी नेताओं ने कहा कि सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया जाएगा। हर विधायक एक नाम पर सहमत दिखाई दिया। मुंबई में शाम होते-होते शपथ समारोह की तैयारियां तेज हो गईं।
मुंबई में एक इतिहास बनने वाली शपथ
शाम 5 बजे मुंबई में शपथ ग्रहण समारोह होगा। सुनेत्रा पवार पहले ही बारामती से मुंबई आई हैं। सुरक्षित क्षेत्र से लेकर मंच तक हर व्यवस्था नवीकृत की जा रही है। महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री वे शपथ लेंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह राज्य राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है।
राज्यसभा सीट पर बहस
डिप्टी सीएम बनने पर सुनेत्रा पवार को राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा देना होगा। ऐसे में खाली सीट को लेकर भी चर्चाएं जल्दी होती हैं। माना जाता है कि पार्थ पवार को यह काम मिल सकता है। पार्टी ने इस बारे में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
सुनेत्रा पवार?
1963 में महाराष्ट्र के धराशिव जिले में सुनेत्रा पवार का जन्म हुआ। उनका परिवार राजनीतिक है। उनके पिता बाजीराव पाटिल ने अपने समय में बहुत बड़ा नेतृत्व किया था। उनके भाई पद्मसिंह पाटिल दो बार सांसद और मंत्री रहे हैं।
पुस्तक पढ़ते समय सुनेत्रा पवार बहुत अनुशासित थीं। 1983 में उन्होंने सरस्वती भुवन कॉलेज, संभाजीनगर से वाणिज्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
विवाह और स्वतंत्र जीवन
उनका विवाह 1985 में अजित पवार से हुआ था। राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह शादी अहम मानी गई। विवाह के बाद वे राजनीति में सक्रियता से दूर रहीं। उन्हें कभी मंच पर बोलने में जल्दी नहीं हुई।
वे परिवार और समाज को एकजुट करने में माहिर थीं।
सामाजिक कार्यों की पहचान
सुनेत्रा पवार ने राजनीति से दूर रहते हुए भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। काटेवाड़ी गांव में सार्वजनिक शौचालय बनाने की कोशिश को पहला बड़ा कदम बताया जाता है। यह काम गांव की छवि बदल गया।
काटेवाड़ी को 2006 में निर्मल ग्राम पुरस्कार मिला। गाँव खुले में शौच से मुक्त था। सुनेत्रा पवार को यह उपलब्धि एक नई पहचान मिली।
उद्योग और शिक्षा के बीच संबंध
2008 में बारामती हाईटेक टेक्सटाइल पार्क का उद्घाटन किया गया था। वे इसका भी अध्यक्ष थे। स्थानीय युवाओं को इस पहल से नौकरी मिली।
वे शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय हैं और विद्या प्रतिष्ठान की ट्रस्टी हैं। उनका विचार है कि शिक्षा ही असली बदलाव के लिए आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति
2011 से वे फ्रांसीसी थिंक टैंक वर्ल्ड एंटरप्रेन्योरशिप फोरम में शामिल हैं। यहां उन्होंने उद्यमिता और विकास पर काम किया।
2017 में वे पुणे विश्वविद्यालय की सीनेट में शामिल हुईं। इससे उनकी शिक्षा जगत में पकड़ मजबूत हुई।
राजनीति में सक्रिय भागीदारी
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से अलग होने के बाद सुनेत्रा पवार ने राजनीतिक कार्यक्रमों में खुलकर भाग लेना शुरू किया। वे बैठकों में आने लगीं। कार्यकर्ताओं के बीच बातचीत बढ़ी।
2024 में उन्होंने बारामती से लोकसभा चुनाव लड़ा। मुकाबला मुश्किल था। लेकिन सुप्रिया सुले ने उन्हें हराया।
विधानसभा से डिप्टी सीएम
चुनाव हार के बाद भी उनका राजनीतिक अभियान जारी रहा। 18 जून 2024 को वे राज्यसभा में शामिल हो गईं। उन्होंने संसद के ऊपरी सदन में एक शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई।
अब वे डिप्टी सीएम की शपथ लेंगे। यह पद उनके लिए एक बड़ा मौका और एक नई चुनौती है।
पार्टी क्या कहती है?
एनसीपी नेताओं का मानना है कि सुनेत्रा पवार का अनुभव और संयम राज्य को मजबूत नेतृत्व दे सकता है। पार्टी में उन्हें भरोसेमंद व्यक्ति मानते हैं।
संगठन को उनके नेतृत्व में नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
आगे की दिशा
डिप्टी सीएम बनने के बाद सुनेत्रा पवार को कई चुनौतियां सामने आएंगी। शासन, राजनीति और आम आदमी की अपेक्षाओं को एक साथ संभालना होगा।
साथ ही, उनके प्रशंसकों का कहना है कि वे दबाव में सहनशील रहना जानती हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत यही है।
उत्कर्ष
यह यात्रा बारामती की बहू से महाराष्ट्र की सत्ता तक प्रेरक है। सुनेत्रा पवार की कहानी बताती है कि राजनीति करने के लिए काम करना और धैर्य करना भी आवश्यक है।
यदि वे शपथ लेती हैं, तो यह केवल एक घोषणा नहीं होगी। यह राज्य की राजनीति में एक नवीन विचार का उद्घाटन करेगा।