भारत-अमेरिका के रिश्ते दुनिया भर में चर्चा का विषय रहे हैं। कभी दोस्ती होती है, तो कभी मतभेद होता है। हाल ही में दोनों देशों के संबंधों को लेकर एक खबर ने चर्चा की। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबीओ और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल के बीच एक व्यस्त बैठक हुई थी। इस मुलाकात से भारत-अमेरिका संबंधों में सुधार हुआ और टैरिफ कम हुए। लेकिन अब भारत के विदेश मंत्रालय ने पूरी कहानी गलत बताई है। मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी कोई बैठक हुई ही नहीं। इस घोषणा के बाद कई प्रश्न उठाए गए हैं और कई उत्तर मिले हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों की शुरुआत
भारत-अमेरिका के संबंध पिछले कुछ समय से अस्थिर रहे हैं। भारत और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा जब ट्रम्प ने भारत पर भारी टैरिफ लगाया। भारत के सामान पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया था। भारत को इससे आर्थिक नुकसान हुआ और रिश्तों में तनाव आया।
अमेरिका ने बाद में यह टैरिफ घटाकर 18% कर दिया। इस निर्णय से स्थिति कुछ शांत हुई। लोगों ने दोनों देशों का फिर से करीब आना मान लिया। तब एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट आई, जिससे बहस शुरू हुई।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट ने हंगामा मचा दिया
भारत और अमेरिका के बीच पिछले साल एक महत्वपूर्ण बातचीत हुई, विदेशी मीडिया ने कहा। रिपोर्ट के अनुसार, अजीत डोभाल ने अमेरिका में मार्को रुबियो से स्पष्ट और कठोर बातचीत की थी।
डोभाल ने अमेरिका को बताया कि भारत दबाव के अधीन नहीं है। वह स्वयं निर्णय लेता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इसी बातचीत ने दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाया और टैरिफ को कम किया।
यह खबर बहुत जल्दी फैल गई। इसकी चर्चा सोशल मीडिया और अखबारों में होने लगी। लोगों ने सोचा कि कोई बड़ी कूटनीतिक चाल छिपी हुई है।
विदेश मंत्रालय का स्पष्ट विरोध
भारत में यह खबर चर्चा का विषय बनने पर विदेश मंत्रालय से सवाल पूछा गया। इस पर मंत्रालय के प्रवक्ता रान्धीर जायसवाल ने सीधा जवाब दिया।
उनका कहना था कि इस रिपोर्ट में कोई तथ्य नहीं है। मार्को रुबियो और अजीत डोभाल ने ऐसी कोई बैठक नहीं की। न तो कोई गुप्त बैठक हुई और न ही कोई गंभीर चर्चा हुई।
इस घोषणा के बाद स्पष्ट हो गया कि सरकार का पक्ष और मीडिया में प्रसारित खबर अलग हैं। सरकार ने इसे समाप्त कर दिया।
मोदी, पुतिन और जिनपिंग की बैठकें
रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अमेरिका को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से असहज महसूस हुआ था।
इन तीनों नेताओं की तस्वीरें विश्व भर में चर्चा का विषय बन गईं। इससे अमेरिका को पता चला कि भारत अपने पुराने सहयोगियों के साथ भी मजबूत संबंध रखता है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया कि इसी से अमेरिका ने भारत पर दबाव बढ़ाकर टैरिफ जैसे निर्णय लिए। भारत सरकार ने इस विचार को कभी खुलकर नहीं माना।
डोभाल का संदेश
ब्लूमबर्ग ने बताया कि अजीत डोभाल अमेरिका में एक विशिष्ट संदेश लेकर गए थे। भारत ने यह संदेश भेजा था। इसमें कहा गया कि भारत सम्मानपूर्वक रिश्तों को सुधारना चाहता है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत नहीं चाहता था कि अमेरिका उसकी सार्वजनिक आलोचना करे। भारत चाहता था कि बातचीत शांतिपूर्ण और विनम्र हो।
लेकिन विदेश मंत्रालय की अस्वीकृति के बाद यह कहानी अब सवाल उठाती है।
भारत की नाराज़गी और ट्रंप का बयान
उस समय, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कड़ी टिप्पणी की थी। उन्हें भारत की अर्थव्यवस्था को “दुर्लभ इकनॉमी” कहा गया था।
उसने यह भी कहा कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध में मदद कर रहा है। भारत इन बयानों से नाराज़ था।
भारत ने अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी है जब वह निर्णय लेता है। वह किसी प्रकार का प्रेरित नहीं होता।
तनाव कम होने के लक्षण
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कथित मुलाकात के बाद परिस्थितियां बदलने लगीं। बताया गया कि ट्रंप ने मोदी को 16 सितंबर को उनके जन्मदिन पर फोन किया था। मोदी ने अपने कार्यों की प्रशंसा की।
इसके बाद, दोनों नेताओं ने फोन पर बार-बार बातचीत की। साल के अंत तक व्यापार सौदे की चर्चा तेज हो गई।
अमेरिका ने आखिरकार भारत पर लगाए गए टैरिफ को कम करने का निर्णय लिया। इससे रिश्तों और बाजार दोनों में सुधार हुआ।
भारत सरकार का आधिकारिक बयान
अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि वे व्यक्तिगत बातचीत का विवरण नहीं देंगे। यह उनकी कूटनीतिक संस्कृति है।
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत के साथ व्यापार समझौता की घोषणा की। इससे भारत का टैरिफ घटकर 18% रह जाएगा।
यह दर अन्य एशियाई देशों से कम है। भारत इससे बहुत लाभ उठाया।
सत्य क्या है?
अब सच क्या है? भारत सरकार का स्पष्ट इनकार और विदेशी मीडिया की रिपोर्ट अलग हैं।
सरकारी बयान के अनुसार, मार्को रुबियो और अजीत डोभाल ने कोई बैठक नहीं की। इसलिए उससे जुड़ी जानकारी भी गलत है।
लेकिन यह भी सच है कि हाल के महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में सुधार हुआ है। टैरिफ घट गए हैं और बातचीत जारी है।
उत्कर्ष
भारत और अमेरिका जैसे बड़े देशों के संबंधों में कई स्तर हैं। हर निर्णय सिर्फ एक बैठक पर नहीं टिका होता।
सरकार ने साफ कर दिया है कि डोभाल और रुबियो की मुलाकात की खबर गलत है। समाचारों पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक बयान देखना चाहिए।
आज दोनों अमेरिका और भारत आगे बढ़ना चाहते हैं। विरोधाभास हो सकते हैं, लेकिन बातचीत करने का रास्ता खुला है। यही कूटनीति का वास्तविक अर्थ है।