मिडिल ईस्ट में स्थिति एक बार फिर खराब होती दिखती है। ईरान और अमेरिका एक टकराव में हैं। अमेरिकी युद्धपोतों की ताकत समंदर में बढ़ रही है। दूसरी ओर, बातचीत भी चल रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान से चर्चा करना चाहते हैं। लेकिन साथ ही अमेरिका ने ईरान में अपने सबसे बड़े जहाजों को भेजा है। इसलिए पूरे क्षेत्र में भय और चिंता है। छोटे-छोटे कदमों से भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
भू-राजनीतिक तनाव मिडिल ईस्ट में फिर से बढ़ा
मध्य ईस्ट पहले से ही संघर्षपूर्ण क्षेत्र रहा है। यहां बहुत से देशों ने लंबे समय से बहस की है। अब, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कार्रवाई ने परिस्थितियों को और अधिक कठिन बना दिया है। अमेरिका अपनी सुरक्षा नीति और दबाव का प्रदर्शन कर रहा है। ईरान इसे खतरा मानता है। दोनों देशों ने अपनी-अपनी तैयारी की है। यही कारण है कि आम लोगों और पड़ोसी देशों को चिंता होना स्वाभाविक है।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध नहीं, बातचीत बेहतर है
गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उनका दावा था कि वह ईरान से बातचीत करने को तैयार हैं। ट्रंप ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अमेरिका के जहाज बहुत शक्तिशाली हैं। वे ईरान की ओर जा रहे हैं। लेकिन उनका उपयोग नहीं करना सबसे अच्छा होगा।
साथ ही ट्रंप ने संकेत दिया कि दोनों देश बातचीत कर सकते हैं अगर वे चाहते हैं। यह बयान उन्होंने ऐसे समय दिया है जब सैन्य गतिविधियां तेज हो रही हैं। इससे लोगों को शक हो रहा है कि क्या बातचीत वास्तव में होगी या सिर्फ दबाव डालने की चाल है।
अमेरिका की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति
अमेरिका ने मध्य ईस्ट में अपनी सैन्य शक्ति को तेजी से बढ़ा दिया है। बीते दो दिनों में इस क्षेत्र में एक नया अमेरिकी विध्वंसक जहाज पहुंचा है। USS Delbert D. Black नामक जहाज है। इसके आने से यहां छह अमेरिकी विध्वंसक जहाज हैं।
तीन तटीय युद्धपोत और एक बड़ा विमानवाहक पोत पहले से मौजूद हैं। इस तैनाती से पता चलता है कि अमेरिका किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार है। इतने सारे जहाजों की मौजूदगी एक बड़ा संदेश है।
ईरान की चिंता का कारण क्या है?
ईरान को इस अमेरिकी कदम से सीधा खतरा है। अमेरिका की नीतियों से पहले से ही इरान नाराज है। अब जब युद्धपोत उसके आसपास तैनात किए जा रहे हैं, तनाव बढ़ना निश्चित है।
ईरान को लगता है कि अमेरिका उसे झुकाने के लिए दबाव डालता है। इसलिए भी ईरान चुप नहीं है। वह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने में लग गया है।
ईरान की आक्रामक सैन्य तैयारी
ईरान ने भी अमेरिकी तैनाती का जवाब दिया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को एक हजार नए ड्रोन मिल गए हैं। ईरान के सरकारी सूत्रों ने यह खबर दी है।
ईरान का मानना है कि हालात आगे बिगड़ सकते हैं। इसलिए वह किसी भी संघर्ष के लिए तैयार है। ईरान को डर है कि अगर वह अमेरिकी शर्तों पर समझौता करेगा, तो उसे भारी नुकसान हो सकता है।
ईरान ने ड्रोन तकनीक पर विशेष जोर दिया
ईरान ने ड्रोन तकनीक पर काफी काम किया है। पुराने सिद्धांतों को ध्यान में रखकर नए ड्रोन बनाए गए हैं। ईरान ने जून में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों से बहुत कुछ सीखा है।
इन सबकों को ध्यान में रखते हुए ड्रोन को और बेहतर बनाया गया है। इस काम में ईरान का रक्षा मंत्रालय और उसके सैन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। ड्रोन का उद्देश्य देश की सुरक्षा में सुधार करना है।
क्या ड्रोन शामिल हैं?
ईरान को मिले ड्रोन विभिन्न उद्देश्यों के लिए बनाए गए थे। लड़ाकू ड्रोन इनमें हैं, जो हमला कर सकते हैं। कुछ ड्रोन निगरानी के लिए हैं, जो गतिविधियों को दूर से देखते हैं। इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में कुछ ड्रोन उपयोगी हैं।
ड्रोन जमीन, समुद्र और हवा के लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए बनाए गए हैं। इससे ईरान की शक्ति पहले से अधिक बढ़ी है।
समंदर पर बढ़ते खतरे
इतने सारे युद्धपोत और ड्रोन एक साथ समंदर में आमने-सामने होने से खतरा अपने आप बढ़ जाता है। बड़ी बहस एक छोटी सी गलती में बदल सकती है। पश्चिमी मिडिल ईस्ट के कई देश इस घटना को गंभीरता से देख रहे हैं। उन्हें डर है कि युद्ध पूरे क्षेत्र पर प्रभाव डालेगा।
बातचीत या संघर्ष: अगले कदम
आगे क्या होगा, यह सबसे बड़ा सवाल है। क्या डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के नेता वार्ता करेंगे? या फिर यह शक्ति प्रदर्शन युद्ध में बदल जाएगा।
फिलहाल, दोनों देशों ने अपनी-अपनी क्षमता विकसित की है। अमेरिका अपनी नौसेना प्रदर्शित कर रहा है। ईरान अपने ड्रोन बल को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में शांति का रास्ता दिखाई नहीं देता।
आम लोगों पर प्रभाव
इस संघर्ष का प्रभाव सिर्फ सरकारों पर नहीं है। लोग भी डर रहे हैं। तेल की लागत बढ़ने की संभावना है। इससे व्यापार प्रभावित हो सकता है। ईस्ट मिडिल में रहने वाले लोग सबसे अधिक चिंतित हैं।
उत्कर्ष
वर्तमान में मिडिल ईस्ट बहुत कठिन समय से गुजर रहा है। अमेरिका और ईरान की कार्रवाई से परिस्थिति अधिक चिंताजनक हो गई है। ट्रंप की बातचीत निश्चित रूप से आशावादी है। लेकिन समंदर में खड़े युद्धपोत भी लोगों को भयभीत करते हैं।
अब सबका ध्यान अगले कदम पर है। क्या शांति बनी रहेगी? या फिर यह संघर्ष एक बड़े विवाद में बदल जाएगा। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि मध्य ईस्ट में हालात जल्द ही सामान्य होते नहीं दिखते।