वेनेजुएला हमले में अमेरिका को झटका: भारत वाला चिनूक हेलीकॉप्टर बुरी तरह डैमेज, फिर भी लौट आया

वर्तमान में दुनिया भर में अमेरिका का एक गुप्त सैन्य ऑपरेशन चर्चा में है। वेनेजुएला में ऐसा हुआ था। माना जाता है कि इस मिशन का उद्देश्य वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस माडो को गिरफ्तार करना है। माना जाता है कि ऑपरेशन पूरा हो गया, लेकिन इसके लिए भुगतान भी करना पड़ा। इस दौरान अमेरिका का एक बहुत शक्तिशाली हेलीकॉप्टर MH-47 Chinook खराब हो गया। भारत भी यही चिनूक प्रयोग करता है।

यह खबर भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चिनूक विश्व के सबसे विश्वसनीय सैन्य हेलीकॉप्टरों में से एक है। फिर क्या हुआ कि शत्रु ने यह हेलीकॉप्टर मार डाला?

वेनेजुएला में अमेरिका का गुप्त अभियान

समाचारों के अनुसार, अमेरिका ने वेनेजुएला में ड्रग तस्करी की आशंका से यह अभियान चलाया। रात के अंधेरे में अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने काम किया। इस मिशन में लगभग 150 एयरक्राफ्ट थे। लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर और विशिष्ट ऑपरेशन एयरक्राफ्ट इनमें शामिल थे।

इसी दौरान वेनेजुएला की सेना ने MH-47 चिनूक को गोली मार दी। गोलियों ने हेलीकॉप्टर को बहुत नुकसान पहुँचाया। स्थिति इतनी खराब थी कि अंदर बैठे पायलट को भी तीन गोलियां लगी। यह सब हुआ, लेकिन पायलट ने हिम्मत नहीं हारी और हेलीकॉप्टर को उड़ाता रहा।

नुकसान के बाद भी चिनूक वापस आया

बहुत से लोग हैरान हैं कि इतना नुकसान झेलने के बाद भी चिनूक सुरक्षित अमेरिका लौट आया। रिपोर्ट के अनुसार, हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी हुई, लेकिन वह क्रैश नहीं हुआ। मिशन समाप्त होने तक वह वहीं रहा।

अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कहा कि युद्ध के दौरान सबसे अच्छे एयरक्राफ्ट भी कभी-कभी उम्मीद की तरह काम नहीं करते। लेकिन, माना जाता है कि चिनूक की मजबूत बनावट ने कई लोगों को बचाया।

वेनेजुएला की सेना ने चिनूक को क्यों देखा?

चिनूक को सैनिकों और भारी सामान ढोने के लिए अक्सर इस्तेमाल किया जाता है। यह हेलीकॉप्टर युद्ध नहीं है। जब यह दुश्मन की सीधी फायरिंग में आया, तो यह निश्चित रूप से नुकसान होगा।

वेनेजुएला की सेना ने जमीन से गोलियां चलाईं। हेलीकॉप्टर के ढांचे से गोलियां सीधे टकराईं। यह इसके बाद भी हवा में रहा। माना जाता है कि यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

चिनूक हेलीकॉप्टर क्या है?

CH-47 Chinook विश्व में सबसे शक्तिशाली ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर है।

  • यह अमेरिकी कंपनी Boeing का उत्पाद है
  • इसे विशिष्ट संतुलन मिलता है दो बड़े रोटरों से।
  • 10–12 टन का वजन यह उठा सकता है।
  • इसकी गति लगभग 280 km/h है।
  • इसे पहली बार 1960 के दशक में सेना में भर्ती किया गया था।

सेना, हथियार, गाड़ियां और राहत सामग्री को हेलीकॉप्टर से जल्दी पहुंचाने में यह मदद करता है।

चिनूक को सैन्य क्षेत्र का “बादशाह” क्यों कहा जाता है?

Chinuk सिर्फ युद्ध के लिए नहीं बना है। इसका बहुत सारा उपयोग होता है।

  • युद्धक्षेत्र में सैनिकों का प्रस्थान
  • घायल सैनिकों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाना
  • बाढ़ और भूकंप से बचाव
  • दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में सामान पहुंचाना

यही कारण है कि इस हेलीकॉप्टर पर बहुत से देश भरोसा करते हैं।

भारत-चिनूक संबंध

भारत ने भी CH-47F(I) चिनूक हेलीकॉप्टर अपनी वायुसेना के लिए खरीदे हैं। ये खासतौर पर ऊंची पहाड़ियों में काम करेंगे।

ये हेलीकॉप्टर लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में बहुत अच्छे काम कर रहे हैं। इन्हीं की मदद से सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी तोपें और सैनिक भेजे जाते हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने क्या कहा?

The New York Times ने भी इस अमेरिकी ऑपरेशन पर लेख लिखा है। रिपोर्ट बताती है कि चिनूक को बहुत नुकसान हुआ है। इसके बावजूद मिशन पूरा नहीं हुआ।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पायलट ने बहादुरी से बड़ा हादसा टाल दिया।

अमेरिका का क्या सबक है?

अमेरिका इस घटना से एक सीख ले सकता है। तकनीक कितनी भी विकसित हो, युद्ध में हमेशा खतरा रहता है। सबसे अच्छी मशीन भी असफल हो सकती है।

फिर भी, यह स्पष्ट है कि चिनूक जैसी मशीनें कठिन परिस्थितियों में भी काम करती हैं।

सामाजिक मीडिया की उपस्थिति और मूल्य

निकोलेस मादुरो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। वे सोशल प्लेटफॉर्म पर सरकारी फैसलों और भाषणों की जानकारी साझा करते रहते हैं।

उनकी नेट वर्थ पर कई दावे हैं। सरकारी डेटा सार्वजनिक नहीं होता। यही कारण है कि सही रकम बताना मुश्किल है। विशेषज्ञों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति पर कई तरह की अटकलें लगाई जाती हैं।

उत्कर्ष

वेनेजुएला में हुआ यह ऑपरेशन बहुत सारे प्रश्न पैदा करता है। अमेरिका ने अपना लक्ष्य हासिल किया, लेकिन उसे भी नुकसान हुआ। इस घटना के बाद भारत में इस्तेमाल होने वाला चिनूक हेलीकॉप्टर फिर चर्चा में है।

यह घटना बताती है कि युद्ध में कोई भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता। फिर भी, चिनूक ने साबित किया कि क्यों उसे दुनिया का सबसे विश्वसनीय हेलीकॉप्टर कहा जाता है।

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