US–Iran Tension: क्या यह युद्ध की शुरुआत है? अरब सागर में ईरानी ड्रोन गिराए जाने से बढ़ी चिंता

अरब सागर में हुई एक सैन्य घटना ने पूरी दुनिया को मध्य पूर्व की ओर खींचा है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच पहले से चल रहा तनाव अब और गहरा होता दिखता है। अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया, जो अमेरिकी युद्धपोत की ओर बढ़ रहा था। यह सवाल उठता है कि क्या दोनों देशों के बीच स्थिति युद्ध की ओर बढ़ रही है या नहीं। सरकारें सतर्क हैं, और आम लोग भयभीत हैं।

अरबी सागर में हुआ क्या?

अमेरिकी सेना ने बताया कि एक ईरानी ड्रोन अरब सागर में तैनात अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन की ओर तेजी से बढ़ रहा था। अमेरिकी नौसेना ने इसे खतरा समझा। स्थिति को देखते हुए, ड्रोन को अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-35 ने निशाना बनाकर गिरा दिया। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में यह सब हुआ। अमेरिकी सेना ने कहा कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ।

अमेरिकी केंद्रीय कमांड का बयान

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने इस बारे में आधिकारिक बयान जारी किया। बयान में ड्रोन के इरादे स्पष्ट नहीं थे। वह युद्धपोत के बहुत पास आ गया। अमेरिकी बलों ने पहले तनाव कम करने का प्रयास किया, लेकिन ड्रोन जहाज की ओर बढ़ता रहा। सुरक्षित रहने के लिए अंततः कार्रवाई करनी पड़ी।

क्या ड्रोन था?

अमेरिकी सेना ने बताया कि यह शाहेद-139 ड्रोन था, बनाया गया था ईरान से। यह ड्रोन निगरानी के काम में उपयोग किया जाता है और लंबे समय तक उड़ान भर सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे ड्रोन युद्धपोतों को खतरा पैदा कर सकते हैं, खासकर अगर वे बहुत करीब आते हैं। इसलिए त्वरित निर्णय लिया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की तैनाती कहाँ है?

US Abraham Lincoln विमानस्थल ईरान के दक्षिणी तट से लगभग 800 किलोमीटर दूर है। यह एक बड़ा विरोधी समूह है। इसमें कई विध्वंसक और एस्कॉर्ट जहाज शामिल हैं। इस युद्धपोत पर लगभग ९० लड़ाकू विमान एक साथ रखे जा सकते हैं। 3200 से अधिक सैनिक भी यहां तैनात हैं। अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी हाल ही में बढ़ा दी है।

तनाव पहले भी बढ़ा था

यह दोनों देशों के बीच खराब स्थिति की पहली घटना नहीं है। अमेरिकी झंडे वाले एक मालवाहक जहाज को घटना से कुछ घंटे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी सेना ने परेशान किया था। उस जहाज पर एक अमेरिकी क्रू था। इस तरह की घटनाएं दोनों देशों में अविश्वास को बढ़ाती हैं।

क्यों टकराव बढ़ रहा है?

लंबे समय से अमेरिका और ईरान के रिश्ते अच्छे नहीं रहे हैं। क्षेत्रीय राजनीति, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर विवाद है। अमेरिका ने कहा कि वह अपने सैनिकों और जहाजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। ईरान भी कहता है कि अमेरिका अपनी ताकत उसके इलाके में दिखा रहा है।

ईरान की अंदरूनी परिस्थितियां

ईरान भी बदतर है। हाल ही में वहां महंगाई और कमजोर अर्थव्यवस्था के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन हुए हैं। हिंसा की खबरें कई जगह से आईं। सरकार पर आरोप लगे कि प्रदर्शनकारियों पर सख्ती की गई। अमेरिका ने इन घटनाओं पर चिंता जताई और ईरान को चेतावनी दी। इससे दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक तनाव पैदा हुआ।

ईरान सरकार की नीति

ईरानी सरकार ने कहा कि वह वार्ता करने को तैयार है। उसने यह भी स्पष्ट किया है कि वह युद्ध का सामना करने के लिए तैयार है अगर ऐसा होता है। ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने अपने विदेश मंत्री को अमेरिका से वार्ता शुरू करने का आदेश दिया है। ईरान ने कहा कि वह तनाव कम करना चाहता है, लेकिन वह दबाव में नहीं आएगा।

अमेरिका की चेतावनी

अमेरिका ने भी कठोर संदेश भेजा है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि वे किसी भी खतरे पर तत्काल प्रतिक्रिया देंगे। उनका कहना है कि उनका अरब सागर में होना शांति का प्रतीक है। अमेरिका ने भी कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता है।

क्या युद्ध की संभावना है?

ड्रोन गिराने के बाद हर कोई चिंतित है कि क्या युद्ध शुरू हो सकता है। विशेषज्ञों का मत है कि दोनों देश अभी सीधे युद्ध से बचना चाहेंगे। लेकिन बड़े विवाद को भी छोटी घटनाएं बदल सकती हैं। यही कारण है कि हर कदम बहुत सोच-समझकर उठाया जाता है।

दुनिया की मध्य पूर्व की दृष्टि

कई देशों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। तेल की सप्लाई विश्व शांति, समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकती है। अरब सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यहां किसी भी तरह का संघर्ष विश्वव्यापी हो सकता है।

भविष्य में क्या हो सकता है?

आने वाले समय में कूटनीति महत्वपूर्ण होगी। हालात संभल सकते हैं अगर बातचीत जारी रहती है। लेकिन ऐसी घटनाएं फिर से होंगी तो तनाव बढ़ेगा। आम जनता चाहती है कि युद्ध न हो और शांति बनी रहे।

उत्कर्ष

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अरब सागर में ईरानी ड्रोन को मार गिराने से बढ़ा है। दोनों देश अपनी कार्रवाई को सही बता रहे हैं। हालाँकि युद्ध अभी शुरू नहीं हुआ है, हालात खराब हैं। बातचीत से हल निकलेगा या संघर्ष और बढ़ेगा, इस पर पूरी दुनिया की निगाह है। उम्मीद की जा रही है कि शांति सर्वोत्तम विकल्प है।

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