भारत सरकार ने 2026 में पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। यह खबर आते ही देश भर में बहस शुरू हो गई। कई प्रमुख नामों को इस बार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों (कला, समाज सेवा, राजनीति, खेल, विज्ञान और शिक्षा) में काम करने वाले लोगों को यह सम्मान मिला है। विशेष बात यह रही कि कुछ पुरस्कार मरणोपरांत दिए गए, जो इस घटना को भावुक बनाया।
पद्म पुरस्कार इस वर्ष 132 लोगों को मिले हैं। इनमें 114 लोगों को पद्म श्री, 5 को पद्म विभूषण और 13 को पद्म भूषण प्रदान किया गया है। भारत के उन लोगों को यह सम्मान दिया जाता है, जिन्होंने अपने कार्यों से देश का नाम रोशन किया है।
मरणोपरांत अभिनेता धर्मेंद्र को पद्म विभूषण
मरणोपरांत फिल्म जगत के प्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। भारत में यह दूसरा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार है। धर्मेंद्र ने हिंदी सिनेमा को कई अनमोल फिल्में दीं। उनकी विनम्रता, अभिनय और मजबूत किरदार आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
धर्मेंद्र को यह सम्मान सिर्फ फिल्मों के लिए नहीं, बल्कि उस युग के लिए भी है जब सिनेमा लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ था। फिल्म प्रेमियों ने सरकार के इस निर्णय को धन्यवाद दिया है।
मरणोपरांत शिबू सोरेन को पद्म भूषण
झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण मिला है। आदिवासी अधिकारों के लिए शिबू सोरेन ने लंबे समय तक संघर्ष किया। उनका जीवन संघर्ष, विनम्रता और जनता के प्रति समर्पण की मिसाल है।
सरकार ने उनके योगदान का सम्मान किया है। यह झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों के लिए गर्व का क्षण है।
कितने लोगों को पुरस्कार मिला?
सरकारी सूचना के अनुसार, इस साल पांच लोगों को पद्म विभूषण मिला है। 13 लोगों को पद्म भूषण पुरस्कार और 114 लोगों को पद्म श्री पुरस्कार मिलेगा। यह आंकड़ा देश की विविधता और उसके विभिन्न क्षेत्रों में लोगों की उत्कृष्टता को दिखाता है।
बहुत से नाम केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से आए हैं। यह साफ दिखाता है कि प्रतिभा हर राज्य में है।
पद्म विभूषण विजेता नाम
अभिनेता धर्मेंद्र और वी. एस. अच्युतानंदन को इस वर्ष सामाजिक कार्यों के लिए मरणोपरांत सम्मान मिला है। केरल के के. टी. थॉमस को सामाजिक कार्यों और पी. नारायणन को साहित्य और शिक्षा के लिए चुना गया है। यह सम्मान उत्तर प्रदेश के एन. राजम को कला क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मिला है।
इन सभी ने अपने जीवन में समाज को कुछ खास दिया है।
13 लोगों को पद्म भूषण प्रदान
पद्म भूषण विजेताओं की सूची भी बहुत विशिष्ट है। कलाकार अलका याग्निक को यह सम्मान मिला है। सार्वजनिक मामलों के लिए महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी चुना गया है। केरल के अभिनेता मामूटी भी कला के लिए पद्म भूषण से सम्मानित हुए हैं।
इस सूची में उद्योग जगत से उदय कोटक, खेल जगत से विजय अमृतराज और सामाजिक सेवा से जुड़े कई नाम भी हैं। यह सरकार को हर क्षेत्र के योगदान का समान सम्मान देता है।
114 लोगों को पद्मश्री पुरस्कार मिलेगा
पद्मश्री प्राप्त करने वालों की संख्या सर्वाधिक है। इस सूची में कलाकार, वैज्ञानिक, शिक्षक, डॉक्टर और समाजसेवी शामिल हैं। A.E. मुथुनयगम, केरल, विज्ञान और इंजीनियरिंग में विजेता है। उत्तर प्रदेश के कलाकार अनिल कुमार रस्तोगी को सम्मान मिलेगा।
कई नामों को मरणोपरांत पद्मश्री भी दिया गया है। इससे पता चलता है कि अच्छे काम कभी नहीं मरते।
राज्यों की मजबूत उपस्थिति
इस वर्ष के पद्म पुरस्कारों में राज्यों की भागीदारी भी चर्चा में रही। तमिलनाडु को 13, महाराष्ट्र को 16, उत्तर प्रदेश को 11 और पश्चिम बंगाल को 11 सम्मान मिले हैं। केरल, असम और कर्नाटक के नाम भी बहुत हैं।
यह चित्र दिखाता है कि भारत में प्रतिभा है।
कला, खेल और समाजसेवा का सम्मान
खेल जगत में रोहित शर्मा, सविता पूनिया और हरमनप्रीत कौर का नाम चर्चा में है। कला क्षेत्र में भी कई स्थानीय कलाकारों को मौका मिला है। सरकार ने समाज सेवा करने वाले लोगों को भी सम्मान दिया है।
यह चुपचाप समाज के लिए काम करते रहने वालों के लिए प्रेरणा है।
पद्म पुरस्कार की विशिष्टता का क्या अर्थ है?
पद्म पुरस्कार केवल सम्मान नहीं हैं। ये संकेत हैं। ये दिखाते हैं कि सेवा, ईमानदारी और मेहनत के परिणाम अवश्य मिलेंगे। आप चाहे गांव में हो या शहर में, अगर आपका काम देश की सेवा करता है, तो देश आपको याद रखेगा।
हर साल ये पुरस्कार घोषित किए जाते हैं, जिससे देश को नए नायक मिलते हैं।
अंतिम शब्द
2026 पद्म पुरस्कार सूची सम्मान, भावना और प्रेरणा से भरी हुई है। धर्मेंद्र और शिबू सोरेन जैसे नाम हमें हमारे अतीत और संघर्षों की याद दिलाते हैं। वहीं नाम युवा और सक्रिय लोगों से भविष्य की उम्मीद है।
यह पुरस्कार उन लोगों के लिए है जो अपने कार्यों से भारत को सुधारते हैं। पद्म पुरस्कारों की मूल शक्ति यही है।