भारत की अर्थव्यवस्था को अच्छी खबर मिली है। दिसंबर 2025 तक देश का कोर उद्योग 3.7 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले चार महीनों में यह आंकड़ा सबसे अच्छा है। नवंबर 2025 में यह ग्रोथ भी 2.1 प्रतिशत था। यानी ने एक महीने में स्पष्ट सुधार देखा है। इस वृद्धि ने लगता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।
कोर क्षेत्र में आने वाले आठ बड़े उद्योग देश की आर्थिक स्थिति को बताते हैं। जब इनकी रफ्तार बढ़ती है, तो यह पूरे उद्योग पर प्रभाव डालता है। दिसंबर में स्टील और सीमेंट में हुई तेज वृद्धि ने इस ग्रोथ को बढ़ा दिया। साथ ही बिजली, कोयला और उर्वरक उत्पादन में सुधार हुआ। लेकिन गैस और तेल क्षेत्र अभी भी कमजोर हैं।
क्या है कोर क्षेत्र और क्यों यह महत्वपूर्ण है?
कोर क्षेत्र में आठ बड़े उद्योग हैं। इनमें बिजली, सीमेंट, स्टील, कच्चा तेल, कोयला, प्राकृतिक गैस, उर्वरक और रिफाइनरी उत्पाद शामिल हैं। ये सभी कंपनियां देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का लगभग चालीस प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं।
इसका अर्थ स्पष्ट है। कोर क्षेत्र में सुधार पूरी इंडस्ट्री को जीवंत करता है। उत्पादन जारी है। काम मिलता है। सड़कें, घर और बिजली परियोजनाएं तेज होती हैं। इसलिए कोर सेक्टर के आंकड़ों पर बाजार और सरकार की नजर रहती है।
दिसंबर 2025 तक रफ्तार क्यों बढ़ाई जाएगी?
दिसंबर 2025 तक, कोर उद्योग का ग्रोथ 3.7% था। नवंबर की तुलना में यह काफी बेहतर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, स्टील और सीमेंट ने इस बढ़त में सबसे बड़ा योगदान दिया।
स्टील उत्पादन में 6.9% की वृद्धि हुई। यही नहीं, सीमेंट उत्पादन में वृद्धि 13.5% हुई। यह स्पष्ट रूप से बताता है कि निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी गतिविधियों में वृद्धि हो रही है। स्टील और सीमेंट की मांग बढ़ती है जब सड़कें, पुल और घर बनते हैं।
बुनियादी ढांचे की आवश्यकता से मिली मदद
स्टील और सीमेंट की बढ़ती मांग का संकेत है कि सरकार और निजी क्षेत्र इंफ्रास्ट्रक्चर पर धन खर्च कर रहे हैं। बड़े परियोजनाएं चल रही हैं। उद्योग इससे लाभ उठा रहे हैं।
दिसंबर में बिजली उत्पादन में भी 5.3% की वृद्धि हुई। बिजली की मांग बढ़ने से फैक्ट्रियों में अधिक उत्पादन और घरों में अधिक खपत होता है। माना जाता है कि यह आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने का अच्छा संकेत है।
उर्वरक उत्पादन भी 4 प्रतिशत बढ़ा। इससे खेती से जुड़े कार्यों में भी तेजी आई है।
कोयले की वर्तमान स्थिति क्या है?
दिसंबर में कोयला उत्पादन 3.6 प्रतिशत बढ़ा। यह एक सकारात्मक संकेत है क्योंकि कोयला दोनों उद्योगों और बिजली उत्पादन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, अप्रैल से दिसंबर 2025-26 के दौरान कोयला उत्पादन में 0.7% की गिरावट हुई है।
इसका अर्थ है कि महीने के स्तर पर सुधार दिख रहा है, लेकिन सालाना आंकड़े अभी भी दबाव में हैं। फिर भी दिसंबर का प्रदर्शन आशावादी है।
तेल और गैस की वृद्धि चिंता का कारण
तेल और गैस की चिंता बढ़ी, जबकि कई क्षेत्रों ने राहत दी। कच्चे तेल का उत्पादन दिसंबर 2025 तक प्रति वर्ष 5.6% गिर गया था। प्राकृतिक गैस उत्पादन भी 4.4% गिर गया।
इतना ही नहीं, रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन 1% गिर गया। प्राकृतिक गैस का उत्पादन अप्रैल से दिसंबर 2025 तक 3.2 प्रतिशत और कच्चे तेल का उत्पादन 1.9 प्रतिशत घटा है।
यह गिरावट दर्शाती है कि घरेलू गैस और तेल उत्पादन में कुछ पुरानी चुनौतियां अभी भी विद्यमान हैं। नए निवेश और तकनीक की आवश्यकता स्पष्ट है।
रिफाइनरी क्षेत्र ने स्थिति को नियंत्रित किया
रिफाइनरी उत्पादों का प्रदर्शन हालांकि पूरी तरह से बदतर नहीं था। यह अप्रैल से दिसंबर के दौरान कुल मिलाकर 0.1 प्रतिशत बढ़ा। यानी यह क्षेत्र लगभग शांत रहा।
रिफाइनरी क्षेत्र की स्थिरता महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों से जुड़ा हुआ है। महंगाई पर भी असर पड़ सकता है अगर यहां बड़ा झटका लगे।
चार महीने का सर्वोच्च स्तर क्यों महत्वपूर्ण है
कोर उद्योग का आउटपुट दिसंबर 2025 में चार महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। यह अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत है। इसका अर्थ है कि पिछले कुछ महीनों की धीमी गति अब वापस आ गई है।
यह, हालांकि, दिसंबर 2024 तक 5.1 प्रतिशत की ग्रोथ दर से कम है। फिर भी, हर महीने सुधार का संकेत है कि स्थिति बिगड़ नहीं रही है। बल्कि क्रमशः बेहतर हो रहे हैं।
नवंबर के आंकड़ों में सुधार भी हुआ
नवंबर 2025 के कोर सेक्टर ग्रोथ के आंकड़ों को भी सरकार ने बदल दिया है। यह पहले कम था, लेकिन अब 2.1 प्रतिशत है।
इस संशोधन से स्पष्ट होता है कि दिसंबर में देखा गया सुधार अचानक नहीं था। बल्कि यह एक निरंतर प्रगति का हिस्सा है। धीरे-धीरे, यानी उद्योगों की स्थिति मजबूत हो रही है।
दिसंबर से अप्रैल की तस्वीर क्या कहती है?
कोर क्षेत्र का कुल उत्पादन 2.6% बढ़ा है अगर पूरे वित्त वर्ष (अप्रैल से दिसंबर, 2025) को देखें। पिछले वर्ष की इसी अवधि से यह कम है।
तेल और गैस क्षेत्रों का कमजोर प्रदर्शन इसकी मुख्य वजह था। यदि ये क्षेत्रों में सुधार होता, तो कुल विकास और मजबूत हो सकता था।
आगे क्या होगा?
दिसंबर के आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह थमी नहीं है। बल्कि वह क्रमशः आगे बढ़ रहा है। बिजली, स्टील और सीमेंट जैसे क्षेत्रों से उम्मीदें बढ़ी हैं।
अगर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले महीनों में बेहतर नतीजे देखने को मिल सकते हैं। इसमें खेती और बिजली की मांग भी सहायता कर सकती है।
अभी भी चुनौतियां हैं
साथ ही, गैस और तेल की कमजोरी एक बड़ी चुनौती बन गई है। कोर क्षेत्र इन क्षेत्रों में सुधार के बिना पूरी तरह मजबूत नहीं हो सकता।
घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए निवेश, नवीनतम खोज और बेहतर तकनीक की जरूरत है। आने वाले समय में स्थिति बदल सकती है अगर ऐसा होता है।
उत्कर्ष
भारत की अर्थव्यवस्था को दिसंबर 2025 के कोर सेक्टर आंकड़े राहत देंगे। चार महीने की सबसे तेज़ वृद्धि ने दिखाया कि परिस्थितियां संभल रही हैं।
सकारात्मक संकेत हैं, जैसे कि कोयले का बेहतर प्रदर्शन, बिजली और उर्वरक में सुधार और स्टील और सीमेंट में भारी वृद्धि हुई है। साथ ही, गैस और तेल की कमी यह याद दिलाती है कि मार्ग अभी आसान नहीं है।
कुल मिलाकर, इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का औद्योगिक क्षेत्र धीरे-धीरे पटरी पर आ रहा है। अगर यह क्रम जारी रहा, तो आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी।