संयुक्त राष्ट्र में फिर बेनकाब हुआ पाकिस्तान, भारत ने साफ शब्दों में दिया कड़ा संदेश

भारत और पाकिस्तान एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर आमने-सामने आए। इस बार भी वही मुद्दा रहा—आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के झूठे दावे। भारत ने विश्व को स्पष्ट रूप से बताया कि पाकिस्तान के प्रति उसके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है। वह लगातार भारत को बदनाम करता है और आतंकवाद को बढ़ावा देता है।

भारत के प्रतिनिधि ने धीरे-धीरे लेकिन स्पष्ट रूप से कहा कि सच्चाई को लंबे समय तक छिपाया नहीं जा सकता। भारत ने संयुक्त राष्ट्र जैसे विश्वव्यापी मंच पर साफ कर दिया कि झूठ और धमकियों की राजनीति अब काम नहीं करेगी। देश की सुरक्षा और सम्मान को कोई नहीं छोड़ेगा।

भारत के संयुक्त राष्ट्र में दो टूक

भारत ने संयुक्त राष्ट्र की बैठक के दौरान पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान का एक ही कार्यक्रम है। वह एजेंडा है भारत को नुकसान पहुंचाना।

उनका कहना था कि पाकिस्तान भारत पर बार-बार झूठ बोलता है। वह कभी सीमा पर तनाव पैदा करता है और कभी वैश्विक स्तर पर गलत बातें कहता है। भारत ने स्पष्ट कर दिया कि अब हर झूठ पर सच्चाई से प्रतिक्रिया दी जाएगी।

पाकिस्तान का ऑपरेशन सिंदूर पर झूठ

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी भारत ने पाकिस्तान के दावों की पोल खोली। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत को लंबे समय से धमकी दी है। लेकिन 10 मई को परिदृश्य अचानक बदल गया।

उन्हें बताया गया कि उसी दिन पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना से संपर्क किया और युद्ध को समाप्त करने को कहा। यह पाकिस्तान की वास्तविकता से बहुत अलग है। भारत ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के कई एयरबेस को क्षति पहुंचाई। दुनिया इसके सबूत देख सकती है।

सबूत बोलें, कुछ नहीं

हरीश ने कहा कि जले हुए हैंगर और टूटे रनवे की तस्वीरें खुद सच्चाई बताती हैं। इन चित्रों को साझा किया गया था। पाकिस्तान इसके बावजूद यह कहने की कोशिश करता है कि सब कुछ सामान्य है।

भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद के साथ कुछ भी सामान्य नहीं हो सकता। आतंकवाद को पाकिस्तान एक हथियार की तरह इस्तेमाल करता रहा है। अब यह किसी से छिपा नहीं है।

भारत ने आतंकवाद को कड़ी चेतावनी दी

भारत ने यूएन में स्पष्ट संदेश दिया। हरीश ने कहा कि किसी भी हाल में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

साथ ही उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का मंच आतंकवाद को सही ठहराने के लिए नहीं बनाया गया है। ऐसा करने की कोशिश करने से देश इस संस्था के मूल उद्देश्य को भंग करेगा।

भारत का जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर स्पष्ट रुख

भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी नरमी नहीं दिखाई। हरीश ने स्पष्ट रूप से कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का एक अविभाज्य और अभिन्न हिस्सा हैं। यह अतीत में भी था, वर्तमान में भी है और भविष्य में भी रहेगा।

साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। पूरी दुनिया इसे समझनी चाहिए।

पाकिस्तान की विरासत

भारत ने कहा कि पाकिस्तान बार-बार इसी तरह की गलतियाँ करता है। वह भारत को अपनी घरेलू समस्याओं से दूर करने के लिए सम्मानित करता है। इससे न तो उसकी स्थिति सुधरती है और न ही क्षेत्र में शांति बनी रहती है।

भारत ने भी कहा कि पाकिस्तान को अपने घर को पहले देखना चाहिए। सेना अधिक है और लोकतंत्र कमजोर है। देश भर में इसका प्रभाव स्पष्ट है।

27वें संशोधन पर प्रश्न

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के 27वें संशोधन पर भी प्रश्न उठाया। हरीश ने कहा कि इस संशोधन ने सेना को सरकार में दखल देने की अनुमति दी।

उनका कहना था कि इससे कुछ विशिष्ट लोगों को लंबे समय तक सत्ता में बने रहने का अवसर मिलता है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में ऐसा नहीं होना चाहिए। पाकिस्तान को इस पर विचार करना चाहिए।

आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता

भारत ने पाकिस्तान को आत्मनिरीक्षण की सलाह दी। हालात नहीं बदलेंगे जब तक वह आतंकवाद को छोड़कर लोकतंत्र को मजबूत नहीं करेगा।

हरीश ने कहा कि वास्तविक शांति तभी आएगी जब पाकिस्तान अपना व्यवहार बदलेगा। सिर्फ बोलने या झूठ बोलने से कुछ नहीं मिलेगा।

विश्व समुदाय को संदेश

भारत ने भी आतंकवाद को विश्वव्यापी समस्या बताया। यह सिर्फ एक देश की समस्या नहीं है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यदि आतंकवाद आज नहीं रोका गया, तो कल यह और भी घातक हो सकता है। भारत ने सभी देशों से प्रतिबद्धता व्यक्त की।

पाकिस्तान फिर से अलग हो गया

संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिए गए इस बयान से साफ हो गया कि पाकिस्तान की बातें अब बहुत प्रभावी नहीं हैं। भारत ने तथ्यों और सबूतों के साथ अपनी बात पेश की।

दुनिया ने देखा कि कौन सिर्फ आरोप लगा रहा था और कौन सच बोल रहा था। यह पाकिस्तान को एक और गंभीर संदेश देता था।

भारत की मजबूत नीति

भारत ने एक बार फिर अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। भारत अपनी बात मजबूती से रखेगा, चाहे मंच कोई भी हो।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने दिया गया यह बयान सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं था। यह भी एक स्पष्ट चेतावनी थी कि आतंकवाद और झूठ की राजनीति अब काम नहीं करेगी।

उत्कर्ष

इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि भारत अब हर मुद्दे पर मुखर हो गया है। पाकिस्तान के झूठे दावे तथ्यों से प्रतिस्थापित किए जा रहे हैं।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े संस्थागत मंच पर अपनी स्पष्ट और मजबूत बात रखी। यह संदेश सिर्फ पाकिस्तान के लिए नहीं था, बल्कि पूरी दुनिया के लिए था कि सच्चाई और उत्तरदायित्व ही शांति का रास्ता है।

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